नेशनल हेराल्ड मामले में सियासी उबाल: भोपाल में भाजपा दफ्तर का घेराव करेगी कांग्रेस, जीतू पटवारी के नेतृत्व में 3 बजे कूच करेंगे कार्यकर्ता

Political uproar in the National Herald case: Congress to surround BJP office in Bhopal, workers led by Jitu Patwari to march at 3 pm भोपाल। नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ED की कार्रवाई तथा हालिया न्यायालय से मिली राहत के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा पर गांधी परिवार को फंसाने का आरोप लगाते हुए भोपाल में भाजपा कार्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन किया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर 3 बजे कांग्रेस कार्यालय से भाजपा कार्यालय की ओर कूच करेंगे और वहां घेराव करेंगे। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से गांधी परिवार को नेशनल हेराल्ड मामले में फंसाने की कोशिश की। पार्टी नेताओं ने ED की कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। हालांकि, हालिया अदालती फैसले में दिल्ली कोर्ट ने ED की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया, जिसे कांग्रेस ने सत्य की जीत बताया है। MP SAMWADmpsamwad.in

MP Assembly Special Session: मनरेगा योजना का नाम बदलने को लेकर विधानसभा में कांग्रेस का प्रदर्शन, महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठकर जताया विरोध

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा ने आज अपने स्थापना के 69 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर आज 17 दिसंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया है। यह दिन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि ठीक 69 साल पहले, 17 दिसंबर 1956 को मध्यप्रदेश विधानसभा की पहली बैठक हुई थी। वहीं कांग्रेस ने विधानसभा में मनरेगा योजना का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस विधायकों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठकर विरोध किया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि बीजेपी महात्मा गांधी का अपमान कर रही है। उन्होंने कहा कि राम जी के नाम पर कोई नई योजना लानी चाहिए थी, राम जी के नाम पर कोई नई योजना आती तो हम उसकी तारीफ करते। महात्मा गांधी से बीजेपी को तकलीफ है। कांग्रेस के प्रदर्शन पर बोले विधायक रामेश्वर शर्माकांग्रेस के विधानसभा में प्रदर्शन पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को राम से एलर्जी है इसलिए विरोध कर रही है। राम से एलर्जी रखोगे तो रावण से राम तक सबका अंत होगा।कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नाम का इस्तेमाल किया। हम महात्मा गांधी के विचारों और कार्यों का अनुसरण कर रहे हैं। कांग्रेस गांधी का नाम लेकर कई बार सत्ता में आई लेकिन गरीब का घर नहीं बनाया। यह दुनिया जानती है कि महात्मा गांधी के रामराज्य को जमीन पर उतारने का काम किसी ने किया है तो वो पीएम मोदी ने किया है। शर्मा ने कहा कि हमने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया, ग़रीब के पक्के मकान बनाने का काम किया, गरीब के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनाए, किसानों का सम्मान किया क्योंकि यही गांधी जी चाहते थे। सबका साथ सबका विकास – यही काम भाजपा सरकार कर रही है। मनरेगा में मनमोहन सिंह की सरकार के समय भ्रष्टाचार हुआ, अब मनरेगा के बलबूते पर ग्रामीण लोगों का विकास होगा। MP SAMWADmpsamwad.in

रतलाम दौरे में मंत्री विजय शाह नाराज़: लाडली बहनों की मौजूदगी के निर्देश, विभागीय लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत

“If Ladli sisters don’t attend the felicitation ceremony, investigate,” Minister Vijay Shah’s statement becomes a topic of discussion रतलाम ! जिले के प्रभारी मंत्री और मध्य प्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग एवं भोपाल गैस राहत पुनर्वास विभाग के मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह का रतलाम दौरा कई वजहों से सुर्खियों में रहा. कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक के दौरान जहां लाडली बहना योजना को लेकर उनका बयान चर्चा में आया, वहीं अधिकारियों की लापरवाही पर मंत्री का गुस्सा भी खुलकर सामने दिखा. लाडली बहनों को लेकर मंत्री का बयानइस बैठक के दौरान मंत्री विजय शाह ने लाडली बहना योजना का जिक्र करते हुए अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री के दो साल पूरे होने पर सम्मान कार्यक्रम में रतलाम जिले की बहनों की अच्छी मौजूदगी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जिले में करीब ढाई लाख लाडली बहनें हैं, उनमें से कम से कम 50 हजार बहनें कार्यक्रम में आएं, यह सुनिश्चित किया जाए. मंत्री ने कहा कि सरकार हर बहन को हर महीने 1500 रुपये दे रही है, यानी करोड़ों रुपये सीधे उनके खातों में जा रहे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री के सम्मान कार्यक्रम में बहनों का आना सम्मान की बात होगी. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जो बहनें आएंगी, उन्हें 250 रुपये अतिरिक्त देने की व्यवस्था की जाए. साथ ही जो बहनें कार्यक्रम में नहीं आएंगी, उनकी जांच कराई जाए. मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि उनका आधार लिंक न हो या किसी तकनीकी कारण से वे योजना का लाभ नहीं ले पा रही हों. अक्षय ऊर्जा विभाग की चूक पर हंगामाबैठक के दौरान उस समय माहौल गर्म हो गया, जब अक्षय ऊर्जा विभाग की ओर से प्रजेंटेशन देने के लिए विभाग प्रमुख की जगह एक मैकेनिक को भेज दिया गया. जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय ने जब नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के कामकाज की जानकारी मांगी और सामने आए व्यक्ति से उसका पद पूछा गया, तो उसने खुद को मैकेनिक बताया. यह सुनते ही विधायक पांडेय भड़क गए और इसे बैठक का अपमान बताया. इस मामले पर मंत्री विजय शाह ने भी कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि जब मंत्री और विधायक बैठक में मौजूद हों, तब विभाग प्रमुखों का न आना गंभीर अनुशासनहीनता है. मंत्री ने एडीएम से सवाल किया कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी बैठक में क्यों नहीं पहुंचे. उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता बताते हुए सख्त लहजे में चेतावनी दी. सीएम और चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखने के निर्देशमंत्री विजय शाह ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए अपने पीए को मुख्यमंत्री, चीफ सेक्रेटरी और कमिश्नर को पत्र लिखने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जानबूझकर विभाग प्रमुखों को बैठक से दूर रखना गलत संदेश देता है और इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए. मैकेनिक को बाहर भेजा, फिर मिलाया हाथघटना के दौरान जब मैकेनिक संतोष तंवर कुछ कहने की कोशिश करने लगा, तो मंत्री ने उसे सख्त लहजे में बैठक से बाहर जाने को कहा. बाद में मंत्री ने उसे पास बुलाकर हाथ मिलाया और धन्यवाद देते हुए बाहर भेज दिया. यह पूरा घटनाक्रम बैठक में मौजूद किसी व्यक्ति ने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया. MP SAMWADmpsamwad.in

विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक आज, 17 दिसंबर के एजेंडे पर बनेगी रणनीति

Congress Legislature Party to hold crucial meeting ahead of special session; strategy to be chalked out on December 17 agenda भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार, 16 दिसंबर को शाम 7:30 बजे भोपाल स्थित बी-12 (ए), 74 बंगला में आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार करेंगे। इस बैठक में 17 दिसंबर को प्रस्तावित विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस की रणनीति, कार्ययोजना और मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाएगा। बताया गया है कि विशेष सत्र में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के विषय पर चर्चा प्रस्तावित है। इसे देखते हुए कांग्रेस विधायक दल सरकार की नीतियों की समीक्षा कर यह तय करेगा कि सत्र में किन जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया जाए। आर्थिक हालात से लेकर सामाजिक मुद्दों पर मंथनविधायक दल की बैठक में प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, किसानों की समस्याएं, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी, दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों से जुड़े सवालों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही सरकार के दावों और नीतिगत फैसलों की पड़ताल करते हुए विपक्ष की भूमिका तय की जाएगी। उमंग सिंघार का सरकार पर हमलानेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश को सच मायनों में विकसित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए खोखले नारों से काम नहीं चलेगा। इसके लिए ठोस नीतियां और ईमानदार राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक दिवसीय विशेष सत्र केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि इसमें किसानों की आय, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा और प्रदेश की कमजोर आर्थिक स्थिति पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल विशेष सत्र में जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों और प्रदेश के भविष्य की ठोस रूपरेखा को मजबूती के साथ विधानसभा में रखेगा। 16वीं विधानसभा का एक दिवसीय अष्टम सत्रविधानसभा सचिवालय के अनुसार, मध्यप्रदेश की 16वीं विधानसभा का एक दिवसीय अष्टम सत्र बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को सुबह 11 बजे से शुरू होगा। भले ही यह सत्र एक दिन का हो, लेकिन इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान प्रदेश के विकास, अर्थव्यवस्था, रोजगार, किसानों, महिलाओं, युवाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विभिन्न दलों के विधायकों को सरकार की योजनाओं और भविष्य की दिशा पर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा। MP SAMWADmpsamwad.in

एसडीएम की गाड़ी को रेत से भरे ट्रैक्टर ने मारी टक्कर, दो ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त

SDM’s vehicle hit by a tractor loaded with sand, two overloaded tractor-trolleys seized भिंड। लहार क्षेत्र में सोमवार सुबह मिहोना बायपास पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अवैध रेत परिवहन में लगे एक ट्रैक्टर चालक ने कार्रवाई से बचने के प्रयास में लहार एसडीएम विजय सिंह यादव की सरकारी गाड़ी को टक्कर मार दी। गनीमत रही कि इस घटना में एसडीएम समेत किसी को कोई चोट नहीं आई, हालांकि गाड़ी के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा है। जानकारी के अनुसार, एसडीएम विजय सिंह यादव सोमवार को टीएल बैठक में शामिल होने के लिए लहार से भिंड जा रहे थे। इसी दौरान मिहोना बायपास पर उन्हें रेत से भरे कई ट्रैक्टर-ट्रॉली नजर आए, जिनमें से दो वाहन ओवरलोड पाए गए। जब एसडीएम ने इन्हें रोकने की कोशिश की, तो एक ट्रैक्टर चालक ने घबराहट में अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली एसडीएम की गाड़ी में घुसा दी। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम ने मिहोना थाना प्रभारी विजय कैन को अवगत कराया। पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने तत्परता दिखाते हुए घेराबंदी कर दोनों रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर थाने में खड़ा करवा दिया। पुलिस ने ट्रैक्टर चालकों के खिलाफ अवैध रेत परिवहन, ओवरलोडिंग और शासकीय वाहन को क्षतिग्रस्त करने सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। एसडीएम का सख्त संदेशएसडीएम विजय सिंह यादव ने कहा कि अवैध रेत परिवहन में लगे वाहन तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग के कारण आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का दबाव या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। MP SAMWADmpsamwad.in

Gold Silver Rupee: सोना 7 हफ्ते के हाई पर, चांदी 2 लाख के करीब; रुपया 90.56 के नए निचले स्तर पर फिसला

Gold Silver Rupee: Gold at 7-week high, silver nears 2 lakh; Rupee slips to new low of 90.56 घरेलू वायदा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में सोना साढ़े सात हफ्तों के उच्च स्तर के करीब बना रहा। एमसीएक्स पर फरवरी सोने का वायदा 0.02% की हल्की बढ़त के साथ ₹1,32,496 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। यह बढ़त अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 25 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती के बाद बने सकारात्मक रुझान का विस्तार है। इसके उलट, मार्च सिल्वर वायदा में रिकॉर्ड स्तरों के पास प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली, और यह 0.54% गिरकर ₹1,97,861 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखा। चांदी हाल ही में ₹2 लाख प्रति किलो के नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची थी। बुलियन में यह उतार-चढ़ाव कमजोर डॉलर इंडेक्स, वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी अस्थिरता और फेड की नीति के बाद निवेशकों की सोने-चांदी में बढ़ती दिलचस्पी के बीच देखने को मिल रहा है।पिछले सत्र में तेज बढ़तवहीं गुरुवार के कारोबार में सोना और चांदी दोनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती के साथ बंद हुए। गोल्ड फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 2.06% की बढ़त के साथ ₹1,32,469/10 ग्राम पर सेटल हुआ। सिल्वर मार्च कॉन्ट्रैक्ट 5.41% उछलकर ₹1,98,942 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी ने बनाया नया रिकॉर्डफेड की नीतिगत बैठक के बाद मिले संकेतों खासतौर पर 25 आधार अंकों की कटौती से कीमती धातुओं में मजबूत खरीद देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना रही है, जबकि सोना सात सप्ताह की ऊंचाई पर है।रुपये अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचावहीं शुक्रवार सुबह रुपये में भारी कमजोरी देखने को मिली और यह 24 पैसे टूटकर 90.56 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी फंड के लगातार बहिर्वाह ने बाजार भावनाओं को कमजोर किया है।कीमती धातुओं की तेजी को लेकर विशेषज्ञों की रायकीमती धातुओं में हालिया तेजी पर टिप्पणी करते हुए पृथ्वी फिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा कि मजबूत फंडामेंटल्स आने वाले सत्रों में भी सोना और चांदी की कीमतों को सहारा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजारों में रुपये की कमजोरी भी बुलियन को समर्थन प्रदान कर रही है। जैन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,040 प्रति औंस और चांदी $57.70 प्रति औंस के मुख्य सपोर्ट स्तरों को बनाए रख सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि आज के सत्र में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। डॉलर इंडेक्स में हलचल, वैश्विक वित्तीय बाजारों की अस्थिरता और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार दिशा खोजेगा।घरेलू बाजार में सोने के दामदिल्ली22 कैरेट (स्टैंडर्ड गोल्ड): ₹99,168 प्रति 8 ग्राम24 कैरेट (शुद्ध सोना): ₹1,06,784 प्रति 8 ग्राममुंबई22 कैरेट: ₹99,160 प्रति 8 ग्राम24 कैरेट: ₹1,06,720 प्रति 8 ग्राम MP SAMWADmpsamwad.in

एमपी विधानसभा में शीतकालीन सत्र शुरू, छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड पर बच्चों के पुतले और ‘पूतना’ को लेकर पहुंचे विपक्षी विधायक

MP Assembly begins winter session, opposition MLAs arrive with effigies of children and ‘Putana’ to address the Chhindwara cough syrup scandal. भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज प्रारंभ हो गया है। पहले दिन विपक्षी विधायकों ने छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विधायक अपने हाथों में बच्चों के पुतले और ‘पूतना’ को लेकर पहुंचे। विपक्ष ने सरकार को ही पूतना बताया और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। विधानसभा में शून्य काल के दौरान कांग्रेस ने हंगामा किया। सत्र की कम अवधि को लेकर उठाए सवाल। कहा जब विधायक जनहित के मुद्दे उठा ही नहीं सकते हैं तो फिर सत्र बुलाने का क्या मतलब। आसंदी के सामने आकर की नारेबाजी। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की आज बैठक है, उसमें इस विषय पर चर्चा की जा सकती है। अध्यक्ष की व्यवस्था देने के बाद कांग्रेस के सदस्य अपने स्थान पर लौटे। शीतकालीन सत्र में कुल चार बैठकें होंगी। इसमें राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेगी। वहीं, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदाताओं से कराने संबंधी विधेयक, दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और विधायकों के वेतन-भत्ते संशोधन विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। पांच दिसंबर तक चलने वाले सत्र में तीन दिसंबर को अवकाश रहेगा। दो दिसंबर को द्वितीय अनुपूरक बजट (MP Winter Session) प्रस्तुत होगा, जो 10 हजार करोड़ रुपये के आसपास रह सकता है। इसमें ऐसी किसी नई योजना के लिए प्रविधान नहीं रहेंगे, जिसका भार राज्य के कोष पर आए। केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्यांश के साथ, जल जीवन मिशन, भावांतर योजना और अधोसंरचना विकास की योजनाओं के लिए प्रविधान रखे जाएंगे। ‘खाली कुर्सी-भरी कुर्सी’ का चुनाववहीं, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव तीन साल के बाद फिर सीधे मतदाताओं से कराने के लिए संशोधन विधेयक(MP News) रखा जाएगा। 2022 में पार्षदों के माध्यम से अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। नई व्यवस्था में रिकाल व्यवस्था लागू हो जाएंगी यानी अध्यक्ष के प्रति अविश्वास होने पर राज्य निर्वाचन आयोग ‘खाली कुर्सी-भरी कुर्सी’ का चुनाव कराएगा। दुकानदार और कामगारों के लिए सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश, दुकान खोलने के लिए गुमास्ता लाइसेंस की फीस पांच हजार रुपये करने जैसे प्रविधान दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक में प्रस्तावित किए जाएंगे। चार दिन के सत्र में 1497 सवालसत्र के लिए सदस्यों ने 1,497 प्रश्न भेजे हैं। छह स्थगन, 194 ध्यानाकर्षण, 52 शून्यकाल और 14 अशासकीय संकल्प की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। उधर, कांग्रेस सत्र में कानून-व्यवस्था, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग पर अत्याचार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर), जल जीवन मिशन की गड़बड़ी, कृषि उपजों का मूल्य के साथ खाद समय पर नहीं मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगी। MP SAMWADmpsamwad.in

एमपी गज़ब: विकास या बर्बादी? जिम्मेदार कौन इंजीनियरिंग या सरकार- नगर निगम हो, भोपाल मेट्रो या फिर पीडब्ल्यूडी… सभी में हुई घपलेबाजी

MP Ghazab: Development or ruin? Who is responsible: engineering or government? Whether it’s the municipal corporation, the Bhopal Metro, or the Public Works Department… they’re all tainted by corruption. भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर सरकारी इंजीनियरिंग की गंभीर खामियों को लेकर सुर्खियों में है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में मानो इंजीनियरों के बीच यह होड़ चल रही है कि कौन जनता के पैसों की सबसे ज्यादा बर्बादी कर सकता है। इसी सवाल के साथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को कठघरे में खड़ा किया है। भोपाल विकास की 3 तस्वीरें राज्य के सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहीं हैं पहली तस्वीर: सेकंड स्टॉप के पास बन रहा नगर निगम का प्रदेश का अनोखा 40 करोड़ का “नया ऑफिस”। इसकी बेसिक प्लानिंग में भारी चूक सामने आ रहीं है। भोपाल नगर निगम का नया आठ मंजिला कार्यालय 40 करोड़ रुपये में तैयार किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में मीटिंग हॉल की बुनियादी प्लानिंग तक सही नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला नहीं हो पा रहा कि यह इमारत ऑफिस है या इंजीनियरों का “प्रैक्टिकल लैब”, जहां जनता के पैसों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। दूसरी तस्वीर: भोपाल मेट्रो… मानक से कम ऊंचाई पर बना स्टेशन प्रगति पेट्रोल पंम्प और केंद्रीय रिजर्व बैंक के पास भोपाल मेट्रो स्टेशन की ऊंचाई मानकों से कम पाए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन दोनों जगह सड़क और स्टेशन के बीच इतनी कम जगह छोड़ी गई कि बड़ी गाड़ियाँ स्टेशन से टकराने लगीं। तीसरी मुसीबत की तस्वीर: एशबाग के 90 डिग्री रेलवे ओवर ब्रिज की राजधानी के बरखेड़ी स्थित यह सवाल रेलवे ओवरब्रिज बनाने में पीडब्ल्यूडी की इंजीनियरिंग बड़ी फेलुअर साबित हुई है। यहां 90 डिग्री मोड़ वाला ओवर ब्रिज बना दिया, जो बनने से पहले ही जानलेवा बन गया है। करोड़ों रुपये से तैयार ओवर ब्रिज जनता के उपयोग लायक नहीं है। अब इसको उपयोगी बनाने के लिए फिर से करोड़ों रुपये खर्च करने की प्लानिंग बन रहीं है, जिसमें 3 महीने का समय लगना है। विपक्ष का कहना है कि…“यह सिर्फ इंजीनियरिंग गलत नहीं, बल्कि जनता के हजारों करोड़ की योजनाओं के साथ खिलवाड़ है।” विपक्ष का तीखा तंज… मध्यप्रदेश के इंजीनियर बिल्डिंग ब्लॉक गेम खेल रहे हैं”। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश के इंजीनियर्स पहले बिल्डिंग बनाते हैं, फिर तोड़ते हैं, फिर बनाते हैं और फिर से तोड़ देते हैं। मानो यह सरकारी निर्माण नहीं, बच्चों का बिल्डिंग-ब्लॉक गेम हो।” भारी गलतियों के लिए अधिकारी जिम्मेदार कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा और कांग्रेस एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार समेत अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि जब एक आम आदमी अपने घर की छोटी से छोटी प्लानिंग में सावधानी रखता है तो फिर सरकारी परियोजनाओं में बार-बार ऐसी भारी गलतियाँ क्यों हो रही हैं? और अगर गलती इंजीनियर की है तो “भरपाई जनता क्यों करे? कार्रवाई इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं होती?” पीएम मोदी और राज्य सरकार पर विपक्ष का सीधा हमला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निर्माण कार्यों की बार-बार की खामियाँ साबित करती हैं कि “मध्यप्रदेश में सिस्टम नहीं, बर्बादी का मौन राज चल रहा है।” विपक्ष की मांग है कि दोषी इंजीनियरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। निर्माण के हर चरण की थर्ड-पार्टी जांच अनिवार्य की जाए और जनता के पैसों की भरपाई उन अधिकारियों से कराई जाए, जिन्होंने योजनाओं को गलत तरीके से पास किया। प्रदेश में लगातार सामने आ रही इंजीनियरिंग की ये गलतियाँ अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं और जनता पूछ रही है। “विकास के नाम पर आखिर किसके हाथों खेल रही है जनता की गाढ़ी कमाई?” MP SAMWADmpsamwad.in

भारतीय मजदूर संघ ने 46 सूत्रीय मांगें सीएम तक पहुंचाईं, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

Bharatiya Mazdoor Sangh conveyed its 46-point demands to the CM and submitted a memorandum to the Collector. शिवपुरी। भारतीय मजदूर संघ, मध्यप्रदेश ने जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक 46 सूत्रीय मांगपत्र कलेक्टर को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश के लाखों श्रमिक और कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान की अपील की गई है। संगठन ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न वर्गों जैसे दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मी, आउटसोर्स स्टाफ, अतिथि शिक्षक-विद्वान, बिजली कंपनी कर्मचारी, आंगनवाड़ी-आशा कार्यकर्ता, हम्माल-तुलावटी, पटवारी और पंचायत सचिवों की समस्याएं लंबे समय से अनसुलझी हैं। इन सभी के निराकरण के लिए यह विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए हरियाणा मॉडल की तर्ज पर सुरक्षा नीति लागू करना, 10 वर्ष पूरे कर चुके दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करना और संविदा नीति 2023 की विवादित धाराओं को हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अतिथि विद्वानों को 65 वर्ष तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने और बिजली कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी की गई है। अन्य महत्वपूर्ण मांगों में नवनियुक्त कर्मचारियों की स्टाइपेंड व्यवस्था समाप्त कर नियुक्ति से पूर्ण वेतन बहाल करना, स्वास्थ्य बीमा का प्रावधान, पदोन्नति प्रक्रिया फिर से शुरू करना, आशा, आंगनवाड़ी, रसोईया और हम्मालों का मानदेय बढ़ाना शामिल है। ज्ञापन सौंपते समय भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष फतेह सिंह गुर्जर, जिला मंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे। MP SAMWADmpsamwad.in

कंपनियों से निकलने वाला रासायनिक सीवेज का पानी बेतवा नदी को कर रहा है प्रदूषित,

Chemical sewage water from companies is polluting the Betwa River. मंडीदीप। मध्य प्रदेश सरकार नदियों को संभालने के लिए भरसक प्रयास कर रही है परंतु राजधानी के सटीक औद्योगिक शहर मंडीदीप मे कंपनियों से निकलने वाले रासायनिक केमिकलो से नदियां प्रदूषित हो रही है जिसको रोकने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है प्राप्त जानकारी के अनुसार नदियों की हालत यह है कि कंपनियों से निकलने वाला काला रसायन युक्त पानी एवं सीवेज का पानी नदियों में मिलने से बदबू चारों ओर फैल रही है जिसके कारण नदी प्रदूषित हो ही रही है। साथ ही बदबू आने से लोगों का आवागमन दुश्वार है जिसकी चमक अब बेतवा नदी के अस्तित्व पर भारी पड़ती नजर आ रही है। यहां की दर्जनों औद्योगिक इकाइयों से प्रतिदिन हजारों लीटर गंदा पानी बिना शोधन के नदी में गिराया जा रहा है। परिणामस्वरूप बेतवा का जल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है और इसका असर मानव, पशु एवं पर्यावरण पर सीधा पड़ रहा है। कंपनियां कर रही है प्रदूषितमंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र की कई बड़ी इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक युक्त अपशिष्ट सीधे नालों के माध्यम से बहकर बेतवा नदी में जा रहा है। शुद्धिकरण संयंत्र (ETP) केवल कागजों में सक्रिय हैं, हकीकत में अधिकांश इकाइयों में उनका संचालन नहीं किया जा रहा। नाला बनकर नदी में बहाते हे गंदा पानीऔद्योगिक क्षेत्र से लेकर बेतवा के किनारों तक छोटे-बड़े नाले दिखाई देते हैं, जिनसे लगातार काला और बदबूदार पानी नदी में मिल रहा है। यह दृश्य न केवल प्रदूषण की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है। बेतवा नदी मंडीदीप पहुंचते ही गंदे पानी से हो जाती है दूषितबेतवा नदी जब मंडीदीप सीमा में प्रवेश करती है, तो उसका जल बिल्कुल साफ दिखाई देता है। लेकिन कुछ ही किलोमीटर बाद पानी का रंग हरा-काला पड़ जाता है, जिसमें झाग और तेल की परतें स्पष्ट नजर आती हैं। दूषित जल में जलीय जीवों की हो रही है मृत्युरासायनिक अपशिष्ट और ऑक्सीजन की कमी के कारण नदी में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु हो रही है। स्थानीय मछुआरे बताते हैं कि अब नदी में जीव-जंतुओं की संख्या तेजी से घट गई है। किसान अपने खेतों में नहीं देते बेतवा का पानीबेतवा का पानी इतना जहरीला हो गया है कि किसान अब इससे अपने खेतों की सिंचाई करने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि इस पानी से फसलें खराब हो जाती हैं और मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है। जानवर भी नहीं पीते बेतवा का पानीस्थानीय पशुपालक बताते हैं कि अब उनके मवेशी भी बेतवा नदी का पानी नहीं पीते। नदी के किनारे जब पशु चराने जाते हैं, तो बदबू और झाग देखकर वे स्वयं पीछे हट जाते हैं। बेतवा नदी का अस्तित्व खतरे में प्रशासन को रहना पड़ेगा सतर्कयदि यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी का प्राकृतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। एक ओर उद्योगों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय सुरक्षा के मानक पूरी तरह नजरअंदाज किए जा रहे हैं। प्रशासन को सतर्क होकर नदियों का अस्तित्व बचाना चाहिए जिम्मेदार अधिकारी मूखदर्शक दर्शक बने देख रहे हैं तमाशास्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर पालिका और जिला प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग निश्चिंत होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जनता की मांग बेतवा को बचाने तुरंत हो सख्त कार्रवाईपर्यावरण प्रेमियों ने मुख्यमंत्री एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि मंडीदीप की सभी औद्योगिक इकाइयों की जांच की जाए, दोषी उद्योगों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और बेतवा नदी को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इनका कहना है। MP SAMWADmpsamwad.in