एमपी विधानसभा में शीतकालीन सत्र शुरू, छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड पर बच्चों के पुतले और ‘पूतना’ को लेकर पहुंचे विपक्षी विधायक

MP Assembly begins winter session, opposition MLAs arrive with effigies of children and ‘Putana’ to address the Chhindwara cough syrup scandal. भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज प्रारंभ हो गया है। पहले दिन विपक्षी विधायकों ने छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विधायक अपने हाथों में बच्चों के पुतले और ‘पूतना’ को लेकर पहुंचे। विपक्ष ने सरकार को ही पूतना बताया और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। विधानसभा में शून्य काल के दौरान कांग्रेस ने हंगामा किया। सत्र की कम अवधि को लेकर उठाए सवाल। कहा जब विधायक जनहित के मुद्दे उठा ही नहीं सकते हैं तो फिर सत्र बुलाने का क्या मतलब। आसंदी के सामने आकर की नारेबाजी। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की आज बैठक है, उसमें इस विषय पर चर्चा की जा सकती है। अध्यक्ष की व्यवस्था देने के बाद कांग्रेस के सदस्य अपने स्थान पर लौटे। शीतकालीन सत्र में कुल चार बैठकें होंगी। इसमें राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेगी। वहीं, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदाताओं से कराने संबंधी विधेयक, दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और विधायकों के वेतन-भत्ते संशोधन विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। पांच दिसंबर तक चलने वाले सत्र में तीन दिसंबर को अवकाश रहेगा। दो दिसंबर को द्वितीय अनुपूरक बजट (MP Winter Session) प्रस्तुत होगा, जो 10 हजार करोड़ रुपये के आसपास रह सकता है। इसमें ऐसी किसी नई योजना के लिए प्रविधान नहीं रहेंगे, जिसका भार राज्य के कोष पर आए। केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्यांश के साथ, जल जीवन मिशन, भावांतर योजना और अधोसंरचना विकास की योजनाओं के लिए प्रविधान रखे जाएंगे। ‘खाली कुर्सी-भरी कुर्सी’ का चुनाववहीं, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव तीन साल के बाद फिर सीधे मतदाताओं से कराने के लिए संशोधन विधेयक(MP News) रखा जाएगा। 2022 में पार्षदों के माध्यम से अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। नई व्यवस्था में रिकाल व्यवस्था लागू हो जाएंगी यानी अध्यक्ष के प्रति अविश्वास होने पर राज्य निर्वाचन आयोग ‘खाली कुर्सी-भरी कुर्सी’ का चुनाव कराएगा। दुकानदार और कामगारों के लिए सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश, दुकान खोलने के लिए गुमास्ता लाइसेंस की फीस पांच हजार रुपये करने जैसे प्रविधान दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक में प्रस्तावित किए जाएंगे। चार दिन के सत्र में 1497 सवालसत्र के लिए सदस्यों ने 1,497 प्रश्न भेजे हैं। छह स्थगन, 194 ध्यानाकर्षण, 52 शून्यकाल और 14 अशासकीय संकल्प की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। उधर, कांग्रेस सत्र में कानून-व्यवस्था, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग पर अत्याचार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर), जल जीवन मिशन की गड़बड़ी, कृषि उपजों का मूल्य के साथ खाद समय पर नहीं मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगी। MP SAMWADmpsamwad.in

एमपी गज़ब: विकास या बर्बादी? जिम्मेदार कौन इंजीनियरिंग या सरकार- नगर निगम हो, भोपाल मेट्रो या फिर पीडब्ल्यूडी… सभी में हुई घपलेबाजी

MP Ghazab: Development or ruin? Who is responsible: engineering or government? Whether it’s the municipal corporation, the Bhopal Metro, or the Public Works Department… they’re all tainted by corruption. भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर सरकारी इंजीनियरिंग की गंभीर खामियों को लेकर सुर्खियों में है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में मानो इंजीनियरों के बीच यह होड़ चल रही है कि कौन जनता के पैसों की सबसे ज्यादा बर्बादी कर सकता है। इसी सवाल के साथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को कठघरे में खड़ा किया है। भोपाल विकास की 3 तस्वीरें राज्य के सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहीं हैं पहली तस्वीर: सेकंड स्टॉप के पास बन रहा नगर निगम का प्रदेश का अनोखा 40 करोड़ का “नया ऑफिस”। इसकी बेसिक प्लानिंग में भारी चूक सामने आ रहीं है। भोपाल नगर निगम का नया आठ मंजिला कार्यालय 40 करोड़ रुपये में तैयार किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में मीटिंग हॉल की बुनियादी प्लानिंग तक सही नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला नहीं हो पा रहा कि यह इमारत ऑफिस है या इंजीनियरों का “प्रैक्टिकल लैब”, जहां जनता के पैसों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। दूसरी तस्वीर: भोपाल मेट्रो… मानक से कम ऊंचाई पर बना स्टेशन प्रगति पेट्रोल पंम्प और केंद्रीय रिजर्व बैंक के पास भोपाल मेट्रो स्टेशन की ऊंचाई मानकों से कम पाए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन दोनों जगह सड़क और स्टेशन के बीच इतनी कम जगह छोड़ी गई कि बड़ी गाड़ियाँ स्टेशन से टकराने लगीं। तीसरी मुसीबत की तस्वीर: एशबाग के 90 डिग्री रेलवे ओवर ब्रिज की राजधानी के बरखेड़ी स्थित यह सवाल रेलवे ओवरब्रिज बनाने में पीडब्ल्यूडी की इंजीनियरिंग बड़ी फेलुअर साबित हुई है। यहां 90 डिग्री मोड़ वाला ओवर ब्रिज बना दिया, जो बनने से पहले ही जानलेवा बन गया है। करोड़ों रुपये से तैयार ओवर ब्रिज जनता के उपयोग लायक नहीं है। अब इसको उपयोगी बनाने के लिए फिर से करोड़ों रुपये खर्च करने की प्लानिंग बन रहीं है, जिसमें 3 महीने का समय लगना है। विपक्ष का कहना है कि…“यह सिर्फ इंजीनियरिंग गलत नहीं, बल्कि जनता के हजारों करोड़ की योजनाओं के साथ खिलवाड़ है।” विपक्ष का तीखा तंज… मध्यप्रदेश के इंजीनियर बिल्डिंग ब्लॉक गेम खेल रहे हैं”। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश के इंजीनियर्स पहले बिल्डिंग बनाते हैं, फिर तोड़ते हैं, फिर बनाते हैं और फिर से तोड़ देते हैं। मानो यह सरकारी निर्माण नहीं, बच्चों का बिल्डिंग-ब्लॉक गेम हो।” भारी गलतियों के लिए अधिकारी जिम्मेदार कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा और कांग्रेस एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार समेत अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि जब एक आम आदमी अपने घर की छोटी से छोटी प्लानिंग में सावधानी रखता है तो फिर सरकारी परियोजनाओं में बार-बार ऐसी भारी गलतियाँ क्यों हो रही हैं? और अगर गलती इंजीनियर की है तो “भरपाई जनता क्यों करे? कार्रवाई इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं होती?” पीएम मोदी और राज्य सरकार पर विपक्ष का सीधा हमला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निर्माण कार्यों की बार-बार की खामियाँ साबित करती हैं कि “मध्यप्रदेश में सिस्टम नहीं, बर्बादी का मौन राज चल रहा है।” विपक्ष की मांग है कि दोषी इंजीनियरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। निर्माण के हर चरण की थर्ड-पार्टी जांच अनिवार्य की जाए और जनता के पैसों की भरपाई उन अधिकारियों से कराई जाए, जिन्होंने योजनाओं को गलत तरीके से पास किया। प्रदेश में लगातार सामने आ रही इंजीनियरिंग की ये गलतियाँ अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं और जनता पूछ रही है। “विकास के नाम पर आखिर किसके हाथों खेल रही है जनता की गाढ़ी कमाई?” MP SAMWADmpsamwad.in

भारतीय मजदूर संघ ने 46 सूत्रीय मांगें सीएम तक पहुंचाईं, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

Bharatiya Mazdoor Sangh conveyed its 46-point demands to the CM and submitted a memorandum to the Collector. शिवपुरी। भारतीय मजदूर संघ, मध्यप्रदेश ने जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक 46 सूत्रीय मांगपत्र कलेक्टर को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश के लाखों श्रमिक और कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान की अपील की गई है। संगठन ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न वर्गों जैसे दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मी, आउटसोर्स स्टाफ, अतिथि शिक्षक-विद्वान, बिजली कंपनी कर्मचारी, आंगनवाड़ी-आशा कार्यकर्ता, हम्माल-तुलावटी, पटवारी और पंचायत सचिवों की समस्याएं लंबे समय से अनसुलझी हैं। इन सभी के निराकरण के लिए यह विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए हरियाणा मॉडल की तर्ज पर सुरक्षा नीति लागू करना, 10 वर्ष पूरे कर चुके दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करना और संविदा नीति 2023 की विवादित धाराओं को हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अतिथि विद्वानों को 65 वर्ष तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने और बिजली कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी की गई है। अन्य महत्वपूर्ण मांगों में नवनियुक्त कर्मचारियों की स्टाइपेंड व्यवस्था समाप्त कर नियुक्ति से पूर्ण वेतन बहाल करना, स्वास्थ्य बीमा का प्रावधान, पदोन्नति प्रक्रिया फिर से शुरू करना, आशा, आंगनवाड़ी, रसोईया और हम्मालों का मानदेय बढ़ाना शामिल है। ज्ञापन सौंपते समय भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष फतेह सिंह गुर्जर, जिला मंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे। MP SAMWADmpsamwad.in

कंपनियों से निकलने वाला रासायनिक सीवेज का पानी बेतवा नदी को कर रहा है प्रदूषित,

Chemical sewage water from companies is polluting the Betwa River. मंडीदीप। मध्य प्रदेश सरकार नदियों को संभालने के लिए भरसक प्रयास कर रही है परंतु राजधानी के सटीक औद्योगिक शहर मंडीदीप मे कंपनियों से निकलने वाले रासायनिक केमिकलो से नदियां प्रदूषित हो रही है जिसको रोकने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है प्राप्त जानकारी के अनुसार नदियों की हालत यह है कि कंपनियों से निकलने वाला काला रसायन युक्त पानी एवं सीवेज का पानी नदियों में मिलने से बदबू चारों ओर फैल रही है जिसके कारण नदी प्रदूषित हो ही रही है। साथ ही बदबू आने से लोगों का आवागमन दुश्वार है जिसकी चमक अब बेतवा नदी के अस्तित्व पर भारी पड़ती नजर आ रही है। यहां की दर्जनों औद्योगिक इकाइयों से प्रतिदिन हजारों लीटर गंदा पानी बिना शोधन के नदी में गिराया जा रहा है। परिणामस्वरूप बेतवा का जल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है और इसका असर मानव, पशु एवं पर्यावरण पर सीधा पड़ रहा है। कंपनियां कर रही है प्रदूषितमंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र की कई बड़ी इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक युक्त अपशिष्ट सीधे नालों के माध्यम से बहकर बेतवा नदी में जा रहा है। शुद्धिकरण संयंत्र (ETP) केवल कागजों में सक्रिय हैं, हकीकत में अधिकांश इकाइयों में उनका संचालन नहीं किया जा रहा। नाला बनकर नदी में बहाते हे गंदा पानीऔद्योगिक क्षेत्र से लेकर बेतवा के किनारों तक छोटे-बड़े नाले दिखाई देते हैं, जिनसे लगातार काला और बदबूदार पानी नदी में मिल रहा है। यह दृश्य न केवल प्रदूषण की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है। बेतवा नदी मंडीदीप पहुंचते ही गंदे पानी से हो जाती है दूषितबेतवा नदी जब मंडीदीप सीमा में प्रवेश करती है, तो उसका जल बिल्कुल साफ दिखाई देता है। लेकिन कुछ ही किलोमीटर बाद पानी का रंग हरा-काला पड़ जाता है, जिसमें झाग और तेल की परतें स्पष्ट नजर आती हैं। दूषित जल में जलीय जीवों की हो रही है मृत्युरासायनिक अपशिष्ट और ऑक्सीजन की कमी के कारण नदी में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु हो रही है। स्थानीय मछुआरे बताते हैं कि अब नदी में जीव-जंतुओं की संख्या तेजी से घट गई है। किसान अपने खेतों में नहीं देते बेतवा का पानीबेतवा का पानी इतना जहरीला हो गया है कि किसान अब इससे अपने खेतों की सिंचाई करने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि इस पानी से फसलें खराब हो जाती हैं और मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है। जानवर भी नहीं पीते बेतवा का पानीस्थानीय पशुपालक बताते हैं कि अब उनके मवेशी भी बेतवा नदी का पानी नहीं पीते। नदी के किनारे जब पशु चराने जाते हैं, तो बदबू और झाग देखकर वे स्वयं पीछे हट जाते हैं। बेतवा नदी का अस्तित्व खतरे में प्रशासन को रहना पड़ेगा सतर्कयदि यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी का प्राकृतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। एक ओर उद्योगों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय सुरक्षा के मानक पूरी तरह नजरअंदाज किए जा रहे हैं। प्रशासन को सतर्क होकर नदियों का अस्तित्व बचाना चाहिए जिम्मेदार अधिकारी मूखदर्शक दर्शक बने देख रहे हैं तमाशास्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर पालिका और जिला प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग निश्चिंत होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जनता की मांग बेतवा को बचाने तुरंत हो सख्त कार्रवाईपर्यावरण प्रेमियों ने मुख्यमंत्री एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि मंडीदीप की सभी औद्योगिक इकाइयों की जांच की जाए, दोषी उद्योगों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और बेतवा नदी को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इनका कहना है। MP SAMWADmpsamwad.in

डबल इंजन की भाजपा सरकार में शव वाहन तक उपलब्ध नहीं, किसान कर रहे आत्महत्या

Even hearse vehicles are not available in the double engine BJP government, farmers are committing suicide भोपाल /नीमच। विकास का ढिंढोरा पीटने वाली डबल इंजन की भाजपा सरकार में गरीब बेहाल है। आलम यह है कि मृत्यु होने पर प्रदेश में शव ले जाने के लिए वाहन तक भी उपलब्ध नहीं है। जबकि डबल इंजन की भाजपा सरकार प्रदेश में एयर एम्बुलेंस का दावा करती है और वास्तविकता में प्रदेश में हालात इतने बदहाल हैं कि प्रसूता को ठेलागाड़ी में और शव को बांस के सहारे चादर में लपेट लटका कर ले जाना पड़ रहा है। वहीं किसानों को मुआवजा और फसल बीमा का लाभ न मिलने से किसान भी आत्महत्या करने को मजबूर है। प्रदेश सरकार के काबीना मंत्री और मुख्यमंत्री सत्ता की चाह में बिहार चुनाव में व्यस्त हैं और मप्र में हालात बदतर बने हुए हैं, जिसे देखने वाला कोई नहीं है। इससे प्रमाणित होता है कि प्रदेश में होने वाली दर्दनाक और शर्मशार करने वाली घटनाओं से उन्हें कोई लेना देना नहीं है। मात्र सत्ता सुख भोगना ही भाजपा का लक्ष्य है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी इंजी नवीन कुमार अग्रवाल ने कहा कि एक और भाजपा की डबल इंजन सरकार प्रदेश की जनता को मुंगेरीलाल के हसींन सपने दिखाती है, दूसरी और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं खुद वेंटिलेटर पर हैं। जिसका दुष्परिणाम है कि शहडोल जिले के ब्योहारी में एक महिला की दलदल भरे रास्ते में गिरने से अकाल मृत्यु हो गई। जिसका शव ले जाने के लिए 108 एवं शव वाहन तक घटना स्थल पर नहीं पहुँचा। जिसके बाद ग्रामीणों को शव चादर में लपेटकर लकड़ी के सहारे लटकाकर ले जाना पड़ा। जबकि कुछ समय पूर्व ही ठीक इसी प्रकार से प्रदेश में कई घटनाओं में अस्पताल से घर तक वाहन न मिलने से शव को चादर में लपेटकर बांस के सहारे ले जानएक के समाचार आते रहे हैं। एक प्रसूता को समय पर 108 एम्बुलेंस न मिलने पर ठेलागाड़ी में ले जाने पर रास्ते में ही नवजात की मृत्यु हो गई थी। इन घटनाओं से यही प्रमाणित होता है कि किस प्रकार से प्रदेश की डबल इंजन की भाजपा सरकार जनता के प्रति असंवेदनशील है। अग्रवाल ने कहा कि बीते दिनों श्योपुर जिले के सिरसौंद गांव में एक किसान कैलाश मीणा ने अपनी धान की फसल ख़राब होने के कारण समय पर मुआवजा और फसल बीमा नहीं मिला, जिसके बाद किसान ने अपने खेत पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की किसानो की आय दुगनी करने का वादा मात्र छलावा सिद्ध हो रहा है। आज प्रदेश में किसानो की माली हालत के चलते किसान कर्ज में डूबता जा रहा है। जो असमय मौत को गले लगा रहा है, लेकिन डबल इंजन की भाजपा सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की जगह उनकी लागत पर टैक्स लगाकर बढ़ाती जा रही है। यानि सरकार की गलत नीतियों के कारन किसान आत्महत्या करने को विवश है। अग्रवाल ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रदेश के नागरिकों को अब सोचना होगा उनके द्वारा चुनी हुई सरकार उनके लिए क्या कर रही है? MP SAMWADmpsamwad.in

राष्ट्रीय एकता दिवस पर इंदौर पुलिस ने किया ‘एकता वृक्षारोपण’ कर दिया पेड़ों की तरह एकजुट रहने का संदेश

राष्ट्रीय एकता दिवस पर इंदौर पुलिस ने किया ‘एकता वृक्षारोपण’ कर दिया पेड़ों की तरह एकजुट रहने का संदेश

On National Unity Day, Indore Police planted ‘Ekta Vriksharopan’ (tree plantation) and gave the message of staying united like trees. इंदौर ! लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर मनाए गए राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर इंदौर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया. डीआरपी लाइन परिसर में ‘एकता वृक्षारोपण कार्यक्रम’ आयोजित हुआ.कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त नगरीय इंदौर संतोष कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति रही. अति पुलिस आयुक्त अमित कुमार सिंह, सभी पुलिस उपायुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. सभी ने मिलकर पौधारोपण कर एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संदेश दिया. वृक्षारोपण के दौरान पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि “पेड़ हमें एकता और अखंडता का सच्चा संदेश देते हैं. जिस तरह जड़, तना, शाखाएं और पत्तियां मिलकर एक सशक्त वृक्ष बनाते हैं, उसी प्रकार संगठित रहकर हम एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं.” उन्होंने सभी को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने और सामूहिक एकता की भावना को मजबूत करने का आह्वान भी किया. कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन में एकता, देशभक्ति और सरदार पटेल के प्रेरक व्यक्तित्व से जुड़ाव की भावना को बढ़ाना रहा. MP SAMWADmpsamwad.in

नगर में झमाझम बारिश से फसलें फिर भीगीं, किसानों की बढ़ी चिंता

नगर में झमाझम बारिश से फसलें फिर भीगीं, किसानों की बढ़ी चिंता

Heavy rains in the city have once again drenched crops, raising concerns for farmers. तेंदूखेड़ा ! नगर एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों में आंवला नवमी के दिन दोपहर लगभग 2:00 बजे से लगातार झमाझम बारिश का दौर जारी है। इस अप्रत्याशित मौसम परिवर्तन ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से मौसम सामान्य रहने के कारण अधिकांश किसानों ने अपने खेतों से मक्का और धान की फसल की कटाई कर ली थी। परंतु, कटाई के बाद खेतों एवं खुले स्थानों पर रखी गई फसलें अब लगातार हो रही वर्षा से एक बार फिर पूरी तरह भीग गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। लगातार हो रही बारिश के चलते खेतों में पानी भराव की स्थिति बन गई है। कई जगहों पर धान की कटी हुई फसल पानी में डूब गई है, वहीं खुले में पड़ी मक्का भी नमी के कारण सड़ने की कगार पर पहुंच रही है। इससे न केवल उपज की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि किसानों को आर्थिक नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है।किसानों का कहना है कि मौसम में इस तरह के अचानक बदलाव से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है। धूप न निकलने के कारण फसल सुखाने में दिक्कत आ रही है और भीगी हुई उपज में फफूंदी लगने का खतरा बढ़ गया है। वहीं, मंडियों में भी ऐसी भीगी फसल का दाम घटने की संभावना जताई जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों को नुकसान का आकलन करने और आवश्यक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, नगर प्रशासन ने नागरिकों और किसानों से अपील की है कि वे मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए सतर्क रहें, खेतों में अनावश्यक रूप से न जाएँ और फसलों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएँ। मौसम विभाग के अनुसार, क्षेत्र में अगले कुछ घंटों तक वर्षा जारी रहने की संभावना है। यदि वर्षा का यह क्रम जारी रहा, तो फसलों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में सड़क और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। MP SAMWADmpsamwad.in

भारी वर्षा से चुरहट क्षेत्र के किसानों की फसलें हुई चौपट : अजय सिंह

भारी वर्षा से चुरहट क्षेत्र के किसानों की फसलें हुई चौपट : अजय सिंह

Heavy rains have ruined the crops of farmers in the Churhat region: Ajay Singh सीधी। पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं चुरहट विधानसभा के विधायक अजय सिंह ने कहा है कि पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण चुरहट विधानसभा क्षेत्र एवं आसपास के अंचलों में किसानों की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं।इस भीषण वर्षा ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में लगातार पानी भरे रहने से धान की फसल गलने लगी है, वहीं कई स्थानों पर रबी फसलों की बुवाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि किसानों के लिए अत्यंत त्रासदीपूर्ण बन चुकी है।जिन किसानों ने पूरे वर्ष कठिन परिश्रम करके खेतों में फसल उगाई थी, आज वे अपनी आँखों के सामने अपनी मेहनत को नष्ट होते देख रहे हैं। यह केवल फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि उनकी जीविका, उम्मीद और आत्मनिर्भरता पर सीधा प्रहार है। अजयसिंह ने कहा कि चुरहट और आसपास के क्षेत्रों में कई गाँव ऐसे हैं जहाँ खेतों में पानी का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इससे किसानों के सामने भविष्य की बुवाई का संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीण इलाकों में सड़कें टूट गई हैं, नालियाँ जाम हैं और कई जगहों पर घरों में भी पानी घुस आया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सिंह ने इस स्थिति को “कृषक आपदा” बताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन से तात्कालिक कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा – मैं प्रशासन से आग्रह करता हूँ कि पूरे क्षेत्र में तुरंत सर्वे कराया जाए, किसानों की फसल हानि का सही आकलन कर उचित राहत और मुआवज़ा दिया जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था तत्काल की जाए, ताकि और अधिक नुकसान को रोका जा सके।उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि किसान ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।कृषक हमारे समाज का आधार हैं। अगर खेत सूने होंगे, तो मंडियाँ भी सूनी होंगी। किसानों का दर्द प्रदेश का दर्द है, इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे कठिन समय में उनके साथ खड़ी होकर हर संभव सहायता प्रदान करे।अजय सिंह ने बताया कि उन्होंने स्वयं कई प्रभावित गाँवों से जानकारी ली है और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क में हैं, ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि वे इस पूरे मामले की रिपोर्ट राज्य सरकार को भी भेजेंगे और मंत्रिस्तरीय टीम से चुरहट क्षेत्र का दौरा करवाने की मांग करेंगे।उन्होंने जिला प्रशासन से यह भी कहा कि जिन किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, उनके लिए विशेष राहत शिविर, मुफ्त बीज वितरण, और अगले सीज़न की तैयारी हेतु ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की जाए।अजय सिंह ने अंत में कहा कि यह समय राजनीति का नही, सेवा का है। जो किसान धरती का अन्नदाता है, उसे संकट में छोड़ देना सबसे बड़ी असंवेदनशीलता होगी। मैं प्रदेश सरकार से आग्रह करता हूँ कि चुरहट सहित पूरे सीधी जिले को प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाए और तत्काल राहत पैकेज की घोषणा की जाए। MP SAMWADmpsamwad.in

मध्य प्रदेश आबकारी विभाग में  72 करोड़ का घोटाला ईडी दफ्तर में आरोपियों से पूछताछ जारी 

Rs 72 crore scam in Madhya Pradesh Excise Department, interrogation of accused continues in ED office  इन्दौर । करीब 72 करोड़ के आबकारी घोटाले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर लेने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है। अधिकारियों ने घोटाले में आरोपी तीन ठेकेदारों से पूछताछ की। साथ ही आबकारी विभाग के विवादास्पद वरिष्ठ अधिकारी को बुलाकर घंटों पूछताछ की गई। कई दस्तावेज के बारे में भी जानकारी ली गई। 72 करोड़ की धोखाधड़ी रावजी बाजार थाने में दर्ज केस के आधार पर ईडी के अधिकारियों ने दो आरोपी राजू दशवंत व अंश त्रिवेदी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। इन्हें बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस बीच रावजी बाजार के केस में आरोपी रहे अभिषेक शर्मा, बलराम व जितेंद्र शिवरामे को भी तलब कर पूछताछ की बात सामने आई है। आबकारी विभाग में जमा होने वाली रसीदों में फर्जीवाडा कर 72 करोड़ की धोखाधड़ी की थी। तत्कालीन सहायक आबकारी अधिकारी संजीव दुबे के कार्यकाल में यह घोटाला सामने आया था। पुलिस केस दर्ज होने के बाद कई ठेकेदार व कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ, लेकिन अधिकारियों की भूमिका तय नहीं हो पाई। अफसर का छूटा पसीना ईडी ने तत्कालीन बड़े अधिकारी को तलब किया। उनसे घोटाले के समय की प्रक्रिया नहीं करने को लेकर पूछताछ की व दस्तावेज भी लिए। पूछताछ के दौरान अधिकारी के पसीने छूट गए। अन्य जानकारियों के साथ उन्हें बुलाने की बात कहीं जा रही है। लंबी पूछताछ के बाद अधिकारी को गिरफ्तारी का डर सता रहा है और वे बचने के प्रयास में लग गए हैं। घोटाले के मास्टरमाइंड जांच के दौरान आरोपी राजू दशवंत व अंश त्रिवेदी के बारे में पता चला कि ये ही घोटाले के मास्टरमाइंड थे। इस समय दोनों उदयपुर में शराब कारोबार में जुड़े थे। वहां भी विला बनाकर किराए पर देने की बात भी सामने आई है। आरोपियों की संपत्ति का भी ईडी ने पता लगाया है जिसके आधार पर जल्द अटैच करने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है। MP SAMWADmpsamwad.in

जबलपुर: भेड़ाघाट चौसठ योगिनी मंदिर में चोरी की कोशिश:, मंदिर में बेशकीमती दुर्लभ प्रतिमाएं मौजूद

Jabalpur: Attempted theft at Bhedaghat Chausath Yogini Temple: Priceless rare statues are present in the temple. जितेन्द्र श्रीवास्तव ( विशेष संवाददाता ) जबलपुर। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट के पास मां नर्मदा नदी के तट पर हजारों साल पुराने चौसठ योगिनी मंदिर में चोरी को कोशिश हुई है। अज्ञात चोरों ने कलचुरी काल के प्राचीन दरवाजे को काटने की कोशिश की, हालांकि वे इसमें सफल नहीं हो सके। मंगलवार देर रात पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने घटना की जानकारी भेड़ाघाट थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उन लोगों की तलाश शुरू कर दी है, जिन्होंने मंदिर के दरवाजे को काटने का प्रयास किया। प्रतिमाओं की कीमत लाखों रुपए में इस मंदिर को भारत की धरोहर कहा जाता है। मंदिर परिसर में हजारों साल पुरानी कलचुरी कालीन प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिनका अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य लाखों रुपए में आंका जाता है। यही वजह है कि शातिर चोरों की नजर अब इस प्राचीन धरोहर पर पड़ी है। सोमवार की रात जब धुआंधार में नर्मदा महोत्सव चल रहा था और सैकड़ों लोग वहां इकट्ठा थे, उसी दौरान अज्ञात लोगों ने मंदिर के मुख्य लकड़ी के दरवाजे को किसी धारदार औजार से काटने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलते ही पुरातत्व विभाग के अधिकारी मंगलवार को मंदिर पहुंचे और जांच कर रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद विभाग की ओर से भेड़ाघाट थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। गार्ड चला गया था महोत्सव में, पहले भी चोरी हुई प्रतिमा स्थानीय लोगों के अनुसार, चोरी का यह प्रयास संभवतः नर्मदा महोत्सव के दौरान ही हुआ। मंदिर की देखरेख के लिए नियुक्त चौकीदार रात में महोत्सव देखने चला गया था, तभी चोरों ने मौका पाकर दरवाजे को काटने का प्रयास किया। दरवाजे पर आरी जैसी किसी वस्तु से बने निशान स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। हालांकि चोर दरवाजा पूरी तरह नहीं काट पाए और बिना कुछ चुराए ही भाग गए। भेड़ाघाट के निवासियों का कहना है कि चौसठ योगिनी मंदिर में भगवान शिव-पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है, जिसमें वे नंदी पर विराजमान हैं। ऐसी प्रतिमा पूरे विश्व में और कहीं नहीं मिलती। कुछ साल पहले भी यहां से शंकर-पार्वती की एक दुर्लभ प्रतिमा चोरी हो चुकी है, जो अब तक बरामद नहीं हुई। उस घटना के बाद भी मंदिर की सुरक्षा में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि यह प्राचीन मंदिर देश की अनमोल धरोहर है, इसलिए इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर होनी चाहिए। वे मांग कर रहे हैं कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और एक निगरानी समिति का गठन किया जाए, जो समय-समय पर सुरक्षा की समीक्षा करे। पुरातत्व विभाग के पूर्व अधिकारियों के अनुसार, मंदिर की प्रतिमाएं और दरवाजे अत्यंत प्राचीन हैं, इसलिए उनकी वास्तविक कीमत का आकलन करना कठिन है, लेकिन उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता अपार है। अधीक्षण पुरातत्वविद् जबलपुर मंडल, शिवाकांत बाजपेयी ने बताया कि दरवाजे पर काटने के स्पष्ट निशान मिले हैं। जांच के लिए टीम को मौके पर भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट प्राप्त होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में पाई गई खामियों को दूर किया जाएगा। MP SAMWADmpsamwad.in