Gold Silver Rupee: सोना 7 हफ्ते के हाई पर, चांदी 2 लाख के करीब; रुपया 90.56 के नए निचले स्तर पर फिसला

Gold Silver Rupee: Gold at 7-week high, silver nears 2 lakh; Rupee slips to new low of 90.56 घरेलू वायदा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में सोना साढ़े सात हफ्तों के उच्च स्तर के करीब बना रहा। एमसीएक्स पर फरवरी सोने का वायदा 0.02% की हल्की बढ़त के साथ ₹1,32,496 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। यह बढ़त अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 25 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती के बाद बने सकारात्मक रुझान का विस्तार है। इसके उलट, मार्च सिल्वर वायदा में रिकॉर्ड स्तरों के पास प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली, और यह 0.54% गिरकर ₹1,97,861 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखा। चांदी हाल ही में ₹2 लाख प्रति किलो के नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची थी। बुलियन में यह उतार-चढ़ाव कमजोर डॉलर इंडेक्स, वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी अस्थिरता और फेड की नीति के बाद निवेशकों की सोने-चांदी में बढ़ती दिलचस्पी के बीच देखने को मिल रहा है।पिछले सत्र में तेज बढ़तवहीं गुरुवार के कारोबार में सोना और चांदी दोनों घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती के साथ बंद हुए। गोल्ड फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 2.06% की बढ़त के साथ ₹1,32,469/10 ग्राम पर सेटल हुआ। सिल्वर मार्च कॉन्ट्रैक्ट 5.41% उछलकर ₹1,98,942 प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी ने बनाया नया रिकॉर्डफेड की नीतिगत बैठक के बाद मिले संकेतों खासतौर पर 25 आधार अंकों की कटौती से कीमती धातुओं में मजबूत खरीद देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना रही है, जबकि सोना सात सप्ताह की ऊंचाई पर है।रुपये अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचावहीं शुक्रवार सुबह रुपये में भारी कमजोरी देखने को मिली और यह 24 पैसे टूटकर 90.56 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी फंड के लगातार बहिर्वाह ने बाजार भावनाओं को कमजोर किया है।कीमती धातुओं की तेजी को लेकर विशेषज्ञों की रायकीमती धातुओं में हालिया तेजी पर टिप्पणी करते हुए पृथ्वी फिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा कि मजबूत फंडामेंटल्स आने वाले सत्रों में भी सोना और चांदी की कीमतों को सहारा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजारों में रुपये की कमजोरी भी बुलियन को समर्थन प्रदान कर रही है। जैन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,040 प्रति औंस और चांदी $57.70 प्रति औंस के मुख्य सपोर्ट स्तरों को बनाए रख सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि आज के सत्र में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। डॉलर इंडेक्स में हलचल, वैश्विक वित्तीय बाजारों की अस्थिरता और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से पहले बाजार दिशा खोजेगा।घरेलू बाजार में सोने के दामदिल्ली22 कैरेट (स्टैंडर्ड गोल्ड): ₹99,168 प्रति 8 ग्राम24 कैरेट (शुद्ध सोना): ₹1,06,784 प्रति 8 ग्राममुंबई22 कैरेट: ₹99,160 प्रति 8 ग्राम24 कैरेट: ₹1,06,720 प्रति 8 ग्राम

एमपी विधानसभा में शीतकालीन सत्र शुरू, छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड पर बच्चों के पुतले और ‘पूतना’ को लेकर पहुंचे विपक्षी विधायक

MP Assembly begins winter session, opposition MLAs arrive with effigies of children and ‘Putana’ to address the Chhindwara cough syrup scandal. भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज प्रारंभ हो गया है। पहले दिन विपक्षी विधायकों ने छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विधायक अपने हाथों में बच्चों के पुतले और ‘पूतना’ को लेकर पहुंचे। विपक्ष ने सरकार को ही पूतना बताया और बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया। विधानसभा में शून्य काल के दौरान कांग्रेस ने हंगामा किया। सत्र की कम अवधि को लेकर उठाए सवाल। कहा जब विधायक जनहित के मुद्दे उठा ही नहीं सकते हैं तो फिर सत्र बुलाने का क्या मतलब। आसंदी के सामने आकर की नारेबाजी। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की आज बैठक है, उसमें इस विषय पर चर्चा की जा सकती है। अध्यक्ष की व्यवस्था देने के बाद कांग्रेस के सदस्य अपने स्थान पर लौटे। शीतकालीन सत्र में कुल चार बैठकें होंगी। इसमें राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेगी। वहीं, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदाताओं से कराने संबंधी विधेयक, दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और विधायकों के वेतन-भत्ते संशोधन विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे। पांच दिसंबर तक चलने वाले सत्र में तीन दिसंबर को अवकाश रहेगा। दो दिसंबर को द्वितीय अनुपूरक बजट (MP Winter Session) प्रस्तुत होगा, जो 10 हजार करोड़ रुपये के आसपास रह सकता है। इसमें ऐसी किसी नई योजना के लिए प्रविधान नहीं रहेंगे, जिसका भार राज्य के कोष पर आए। केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्यांश के साथ, जल जीवन मिशन, भावांतर योजना और अधोसंरचना विकास की योजनाओं के लिए प्रविधान रखे जाएंगे। ‘खाली कुर्सी-भरी कुर्सी’ का चुनाववहीं, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव तीन साल के बाद फिर सीधे मतदाताओं से कराने के लिए संशोधन विधेयक(MP News) रखा जाएगा। 2022 में पार्षदों के माध्यम से अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। नई व्यवस्था में रिकाल व्यवस्था लागू हो जाएंगी यानी अध्यक्ष के प्रति अविश्वास होने पर राज्य निर्वाचन आयोग ‘खाली कुर्सी-भरी कुर्सी’ का चुनाव कराएगा। दुकानदार और कामगारों के लिए सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश, दुकान खोलने के लिए गुमास्ता लाइसेंस की फीस पांच हजार रुपये करने जैसे प्रविधान दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक में प्रस्तावित किए जाएंगे। चार दिन के सत्र में 1497 सवालसत्र के लिए सदस्यों ने 1,497 प्रश्न भेजे हैं। छह स्थगन, 194 ध्यानाकर्षण, 52 शून्यकाल और 14 अशासकीय संकल्प की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। उधर, कांग्रेस सत्र में कानून-व्यवस्था, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग पर अत्याचार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर), जल जीवन मिशन की गड़बड़ी, कृषि उपजों का मूल्य के साथ खाद समय पर नहीं मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगी।

कटनी : पीर बाबा बायपास में राष्ट्रीय राजमार्ग के बाधक अतिक्रमणों को हटाने की बड़ी कार्रवाई जारी

Katni: Major action underway to remove encroachments obstructing the National Highway at Peer Baba Bypass. कटनी। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर पीर बाबा बायपास में राष्ट्रीय राजमार्ग के बाधक अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही की जा रही है। मौके पर पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा,एस डी एम कटनी प्रमोद कुमार चतुर्वेदी भी मौजूद। यातायात पुलिस निरीक्षक राहुल पांडेय सहित मौके पर पुलिस अमला उपस्थित। अतिक्रमणों को जेसीबी मशीन लगाकर जमींदोज किया जा रहा है। स्थल पर राजस्व , पुलिस और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों की मौजूद हैं।

एमपी गज़ब: विकास या बर्बादी? जिम्मेदार कौन इंजीनियरिंग या सरकार- नगर निगम हो, भोपाल मेट्रो या फिर पीडब्ल्यूडी… सभी में हुई घपलेबाजी

MP Ghazab: Development or ruin? Who is responsible: engineering or government? Whether it’s the municipal corporation, the Bhopal Metro, or the Public Works Department… they’re all tainted by corruption. भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर सरकारी इंजीनियरिंग की गंभीर खामियों को लेकर सुर्खियों में है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में मानो इंजीनियरों के बीच यह होड़ चल रही है कि कौन जनता के पैसों की सबसे ज्यादा बर्बादी कर सकता है। इसी सवाल के साथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को कठघरे में खड़ा किया है। भोपाल विकास की 3 तस्वीरें राज्य के सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहीं हैं पहली तस्वीर: सेकंड स्टॉप के पास बन रहा नगर निगम का प्रदेश का अनोखा 40 करोड़ का “नया ऑफिस”। इसकी बेसिक प्लानिंग में भारी चूक सामने आ रहीं है। भोपाल नगर निगम का नया आठ मंजिला कार्यालय 40 करोड़ रुपये में तैयार किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में मीटिंग हॉल की बुनियादी प्लानिंग तक सही नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला नहीं हो पा रहा कि यह इमारत ऑफिस है या इंजीनियरों का “प्रैक्टिकल लैब”, जहां जनता के पैसों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। दूसरी तस्वीर: भोपाल मेट्रो… मानक से कम ऊंचाई पर बना स्टेशन प्रगति पेट्रोल पंम्प और केंद्रीय रिजर्व बैंक के पास भोपाल मेट्रो स्टेशन की ऊंचाई मानकों से कम पाए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन दोनों जगह सड़क और स्टेशन के बीच इतनी कम जगह छोड़ी गई कि बड़ी गाड़ियाँ स्टेशन से टकराने लगीं। तीसरी मुसीबत की तस्वीर: एशबाग के 90 डिग्री रेलवे ओवर ब्रिज की राजधानी के बरखेड़ी स्थित यह सवाल रेलवे ओवरब्रिज बनाने में पीडब्ल्यूडी की इंजीनियरिंग बड़ी फेलुअर साबित हुई है। यहां 90 डिग्री मोड़ वाला ओवर ब्रिज बना दिया, जो बनने से पहले ही जानलेवा बन गया है। करोड़ों रुपये से तैयार ओवर ब्रिज जनता के उपयोग लायक नहीं है। अब इसको उपयोगी बनाने के लिए फिर से करोड़ों रुपये खर्च करने की प्लानिंग बन रहीं है, जिसमें 3 महीने का समय लगना है। विपक्ष का कहना है कि…“यह सिर्फ इंजीनियरिंग गलत नहीं, बल्कि जनता के हजारों करोड़ की योजनाओं के साथ खिलवाड़ है।” विपक्ष का तीखा तंज… मध्यप्रदेश के इंजीनियर बिल्डिंग ब्लॉक गेम खेल रहे हैं”। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश के इंजीनियर्स पहले बिल्डिंग बनाते हैं, फिर तोड़ते हैं, फिर बनाते हैं और फिर से तोड़ देते हैं। मानो यह सरकारी निर्माण नहीं, बच्चों का बिल्डिंग-ब्लॉक गेम हो।” भारी गलतियों के लिए अधिकारी जिम्मेदार कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा और कांग्रेस एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार समेत अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि जब एक आम आदमी अपने घर की छोटी से छोटी प्लानिंग में सावधानी रखता है तो फिर सरकारी परियोजनाओं में बार-बार ऐसी भारी गलतियाँ क्यों हो रही हैं? और अगर गलती इंजीनियर की है तो “भरपाई जनता क्यों करे? कार्रवाई इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं होती?” पीएम मोदी और राज्य सरकार पर विपक्ष का सीधा हमला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निर्माण कार्यों की बार-बार की खामियाँ साबित करती हैं कि “मध्यप्रदेश में सिस्टम नहीं, बर्बादी का मौन राज चल रहा है।” विपक्ष की मांग है कि दोषी इंजीनियरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। निर्माण के हर चरण की थर्ड-पार्टी जांच अनिवार्य की जाए और जनता के पैसों की भरपाई उन अधिकारियों से कराई जाए, जिन्होंने योजनाओं को गलत तरीके से पास किया। प्रदेश में लगातार सामने आ रही इंजीनियरिंग की ये गलतियाँ अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं और जनता पूछ रही है। “विकास के नाम पर आखिर किसके हाथों खेल रही है जनता की गाढ़ी कमाई?”

कटनी : कलेक्टर ने सर्वेयर्स को खरीदी केंद्र के नोडल अधिकारी के साथ समन्वय से कार्य करने की दी हिदायत

Katni: The Collector instructed the surveyors to work in coordination with the nodal officer of the procurement centre. कटनी ! कलेक्टर आशीष तिवारी ने धान उपार्जन वर्ष 2025-26 हेतु नियुक्त सर्वेयरों को उपार्जन केन्द्रों के नोडल अधिकारियों से समन्वय बनाकर धान का गुणवत्ता परीक्षण करने की हिदायत दी। सर्वेयर्स प्रतिदिन उपार्जन केन्द्र में समय पर पहुंचें, और सभी की गूगल लोकेशन से प्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाय। कलेक्टर तिवारी ने यह निर्देश मंगलवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में धान उपार्जन हेतु नियुक्त सर्वेयरों,समिति प्रबंधकों और उपार्जन केन्द्र के कंप्यूटर आपरेटर्स के प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए दिये।इस दौरान जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर, जिला आपूर्ति अधिकारी सज्‍जन सिंह परिहार, सहायक आयुक्त सहकारिता राजयशवर्धन कुरील, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पियूष शुक्ला,जिला प्रबंधक मध्यप्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम देवेन्द्र तिवारी, वेयरहाउस कारपोरेशन के जिला प्रबंधक सेंगर सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।कलेक्टर तिवारी ने सर्वेयरों एवं कम्प्यूटर ऑपरेटरों का विस्तृत विवरण संधारित करने हेतु जिला उपार्जन समिति को निर्देशित किया गया। इसके साथ ही कलेक्टर ने कम्प्यूटर ऑपरेटरों को सख्त हिदायत दी गई कि, कृषकों की उपज की तौल जिस क्रम में होती है, उसी क्रम में उनको पावती प्रदान करें एवं उनके उपज का परिदान करें।कलेक्टर तिवारी ने समिति प्रबंधकों को दो टूक लहजे में ताकीद किया की उपार्जन केन्द्रों में बाहरी धान की आवक और दलालों , व्यापारियों एवं बिचौलियों की सक्रियता को रोकने का कार्य सख्ती से करें।कलेक्टर तिवारी ने धान उपार्जन की गुणवत्ता हेतु नियुक्त आर बी एसोसियेट्स के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सर्वेयरों को उनके क्षेत्र और विकासखंड मुख्यालय में ही रुकने और ठहरने आदि का प्रबंध करें। ताकि उपार्जन केन्द्रों में उनकी सहज उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। कलेक्टर ने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में संबंधितों को बख्शा नहीं जाएगा। इसलिए उपार्जन कार्य से संबंधित सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी से कार्य करें।जिला आपूर्ति अधिकारी एवं जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा उपार्जन केन्द्र के प्रभारियों एवं कम्प्यूटर ऑपरेटरों को उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा एवं उपार्जन हेतु आवश्यक सभी संसाधनों की उपलब्धता के सम्बंध में निर्देशित किया तथा भारत सरकार के पोर्टल PCSAP.IN पर उपार्जन केन्द्र में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी एवं फोटोग्राफ्स सही तरीके से अपलोड करने के सम्बंध में प्रशिक्षण दिया गया।, जिसके अनुसार भारत सरकार द्वारा उपार्जन केन्द्रों का श्रेणीकरण किया जाना है। भारतीय खाद्य निगम की मैनेजर गुणवत्ता दीपिका अवधिया ने सर्वेयर्स को पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया। बताया गया कि उपार्जन केन्द्र में बिक्री के लिए आने वाली धान की सर्वेयर गुणवत्ता एप से गुणवत्ता परीक्षण करेंगे। इसके बाद सर्वेयर आनलाइन एप पर दर्ज करेगा। इसके बाद यह नागरिक आपूर्ति निगम के ई -उपार्जन पोर्टल पर दिखने लगेगा कि धान गुणवत्ता पूर्ण एफ ए क्यू श्रेणी की है।

भारतीय मजदूर संघ ने 46 सूत्रीय मांगें सीएम तक पहुंचाईं, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

Bharatiya Mazdoor Sangh conveyed its 46-point demands to the CM and submitted a memorandum to the Collector. शिवपुरी। भारतीय मजदूर संघ, मध्यप्रदेश ने जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक 46 सूत्रीय मांगपत्र कलेक्टर को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश के लाखों श्रमिक और कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान की अपील की गई है। संगठन ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न वर्गों जैसे दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मी, आउटसोर्स स्टाफ, अतिथि शिक्षक-विद्वान, बिजली कंपनी कर्मचारी, आंगनवाड़ी-आशा कार्यकर्ता, हम्माल-तुलावटी, पटवारी और पंचायत सचिवों की समस्याएं लंबे समय से अनसुलझी हैं। इन सभी के निराकरण के लिए यह विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए हरियाणा मॉडल की तर्ज पर सुरक्षा नीति लागू करना, 10 वर्ष पूरे कर चुके दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करना और संविदा नीति 2023 की विवादित धाराओं को हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अतिथि विद्वानों को 65 वर्ष तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने और बिजली कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी की गई है। अन्य महत्वपूर्ण मांगों में नवनियुक्त कर्मचारियों की स्टाइपेंड व्यवस्था समाप्त कर नियुक्ति से पूर्ण वेतन बहाल करना, स्वास्थ्य बीमा का प्रावधान, पदोन्नति प्रक्रिया फिर से शुरू करना, आशा, आंगनवाड़ी, रसोईया और हम्मालों का मानदेय बढ़ाना शामिल है। ज्ञापन सौंपते समय भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष फतेह सिंह गुर्जर, जिला मंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कंपनियों से निकलने वाला रासायनिक सीवेज का पानी बेतवा नदी को कर रहा है प्रदूषित,

Chemical sewage water from companies is polluting the Betwa River. मंडीदीप। मध्य प्रदेश सरकार नदियों को संभालने के लिए भरसक प्रयास कर रही है परंतु राजधानी के सटीक औद्योगिक शहर मंडीदीप मे कंपनियों से निकलने वाले रासायनिक केमिकलो से नदियां प्रदूषित हो रही है जिसको रोकने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है प्राप्त जानकारी के अनुसार नदियों की हालत यह है कि कंपनियों से निकलने वाला काला रसायन युक्त पानी एवं सीवेज का पानी नदियों में मिलने से बदबू चारों ओर फैल रही है जिसके कारण नदी प्रदूषित हो ही रही है। साथ ही बदबू आने से लोगों का आवागमन दुश्वार है जिसकी चमक अब बेतवा नदी के अस्तित्व पर भारी पड़ती नजर आ रही है। यहां की दर्जनों औद्योगिक इकाइयों से प्रतिदिन हजारों लीटर गंदा पानी बिना शोधन के नदी में गिराया जा रहा है। परिणामस्वरूप बेतवा का जल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है और इसका असर मानव, पशु एवं पर्यावरण पर सीधा पड़ रहा है। कंपनियां कर रही है प्रदूषितमंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र की कई बड़ी इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक युक्त अपशिष्ट सीधे नालों के माध्यम से बहकर बेतवा नदी में जा रहा है। शुद्धिकरण संयंत्र (ETP) केवल कागजों में सक्रिय हैं, हकीकत में अधिकांश इकाइयों में उनका संचालन नहीं किया जा रहा। नाला बनकर नदी में बहाते हे गंदा पानीऔद्योगिक क्षेत्र से लेकर बेतवा के किनारों तक छोटे-बड़े नाले दिखाई देते हैं, जिनसे लगातार काला और बदबूदार पानी नदी में मिल रहा है। यह दृश्य न केवल प्रदूषण की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है। बेतवा नदी मंडीदीप पहुंचते ही गंदे पानी से हो जाती है दूषितबेतवा नदी जब मंडीदीप सीमा में प्रवेश करती है, तो उसका जल बिल्कुल साफ दिखाई देता है। लेकिन कुछ ही किलोमीटर बाद पानी का रंग हरा-काला पड़ जाता है, जिसमें झाग और तेल की परतें स्पष्ट नजर आती हैं। दूषित जल में जलीय जीवों की हो रही है मृत्युरासायनिक अपशिष्ट और ऑक्सीजन की कमी के कारण नदी में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु हो रही है। स्थानीय मछुआरे बताते हैं कि अब नदी में जीव-जंतुओं की संख्या तेजी से घट गई है। किसान अपने खेतों में नहीं देते बेतवा का पानीबेतवा का पानी इतना जहरीला हो गया है कि किसान अब इससे अपने खेतों की सिंचाई करने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि इस पानी से फसलें खराब हो जाती हैं और मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है। जानवर भी नहीं पीते बेतवा का पानीस्थानीय पशुपालक बताते हैं कि अब उनके मवेशी भी बेतवा नदी का पानी नहीं पीते। नदी के किनारे जब पशु चराने जाते हैं, तो बदबू और झाग देखकर वे स्वयं पीछे हट जाते हैं। बेतवा नदी का अस्तित्व खतरे में प्रशासन को रहना पड़ेगा सतर्कयदि यही हाल रहा तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी का प्राकृतिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। एक ओर उद्योगों की संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय सुरक्षा के मानक पूरी तरह नजरअंदाज किए जा रहे हैं। प्रशासन को सतर्क होकर नदियों का अस्तित्व बचाना चाहिए जिम्मेदार अधिकारी मूखदर्शक दर्शक बने देख रहे हैं तमाशास्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर पालिका और जिला प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग निश्चिंत होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जनता की मांग बेतवा को बचाने तुरंत हो सख्त कार्रवाईपर्यावरण प्रेमियों ने मुख्यमंत्री एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि मंडीदीप की सभी औद्योगिक इकाइयों की जांच की जाए, दोषी उद्योगों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और बेतवा नदी को बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इनका कहना है।

राज्यरानी समेत 8 ट्रैने जल्दी ही भोपाल से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से चलेंगी

राज्यरानी समेत 8 ट्रैने जल्दी ही भोपाल से नहीं बल्कि रानी कमलापति स्टेशन से चलेंगी

8 trains including Rajya Rani will soon run from Rani Kamlapati station instead of Bhopal. भोपाल। रेलवे प्रशासन कुछ ट्रेनों का संचालन भोपाल स्टेशन की जगह अब रानी कमलापति स्टेशन (RKMP) से शुरू करने की तैयारी में है। इसका सबसे ज्यादा फायदा नए भोपाल की कुछ कॉलोनियो की बजाय रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के ठेकेदार को होगा। जिन ट्रेनों के शिफ्ट होने की जानकारी सामने आ रही है। उसके मुताबिक, भोपाल-दमोह राज्यरानी एक्सप्रेस, ग्वालियर इंटरसिटी, विंध्याचल एक्सप्रेस सहित कुल 8 प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। इनके चलने के समय में परिवर्तन होगा या नहीं, रेलवे ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है। रेलवे इस प्रस्ताव पर फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। अगर अध्ययन में यात्रियों की डिमांड अधिक पाई गई और आरकेएमपी स्टेशन पर नया पिट लाइन बनने के बाद संचालन में दिक्कत नहीं हुई, तो ट्रेनों की शिफ्टिंग कर दी जाएगी। रेल अधिकारियों के अनुसार, इन आठ ट्रेनों से प्रतिदिन करीब 12,000 यात्री एक तरफ से यात्रा करते हैं।हालांकि इस नई व्यवस्था से आंशिक तौर पर नर्मदापुरम रोड, अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा, गुलमोहर, बावड़िया कला में रहने वाले करीब 2.5 लाख यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। भोपाल स्टेशन से ये 8 ट्रेनें होंगी शिफ्ट

छठ महोत्सव में लोक आस्था और संस्कृति का संगम: आनंद नगर में छठ मैया जागरण ने बाँधा समां

Chhath Festival is a confluence of folk faith and culture: Chhath Maiya Jagran enthralled the audience in Anand Nagar. डॉ. राजेंद्र प्रसाद भोजपुरी एकता मंच द्वारा आयोजित छठ पूजा महोत्सव के अंतर्गत आनंद नगर पुलिस चौकी के सामने एक भव्य छठ मैया जागरण का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि भोजपुरी लोक संस्कृति की जीवंत झलक भी प्रस्तुत की। बिहार से आमंत्रित प्रसिद्ध लोक गायकों ने छठी मैया के पारंपरिक गीतों से ऐसा समां बाँधा कि पूरा परिसर भक्तिरस में डूब गया। “उग हे सूरज देव” और “केलवा के पात पर” जैसे गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। हर गीत में प्रकृति, मातृत्व और आस्था की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। महिलाएं पारंपरिक साज-सज्जा में, सूप और दउरा लिए, गीतों पर झूमती रहीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग ने इस जागरण को एक आध्यात्मिक उत्सव की तरह आत्मसात किया।मंच के अध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम सिंह ने कहा, “छठ केवल एक पर्व नहीं, यह हमारी लोक चेतना, मातृशक्ति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। हमारा प्रयास है कि इस सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए, ताकि हमारी जड़ें और मजबूत हों।”

रामटोरिया विद्यालय में विकास की नई पहचान — पेवर ब्लॉक से निखरा स्कूल परिसर, बच्चों और ग्रामीणों ने जताया आभार

रामटोरिया विद्यालय में विकास की नई पहचान — पेवर ब्लॉक से निखरा स्कूल परिसर, बच्चों और ग्रामीणों ने जताया आभार

Ramtoria School celebrates its new development: Paver blocks enhance the school campus, and children and villagers express their gratitude. बड़ा मलहरा। ग्राम पंचायत रामटोरिया में इन दिनों विकास कार्यों की गूंज है। जनपद पंचायत की सीमा में स्थित शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रामटोरिया के परिसर में बस स्टैंड के पास पेवर ब्लॉक बिछाने का कार्य तेज़ी से जारी है। इस कार्य की गुणवत्ता और सुंदरता की चारों ओर सराहना की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले हल्की सी बारिश में ही स्कूल परिसर कीचड़ से भर जाता था। बच्चों का आना-जाना मुश्किल हो जाता था। इस समस्या को बच्चों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ज़िला पंचायत सदस्य श्रीमति खेमाबाई अहिरवार के सामने रखा था। बच्चों की बात को गंभीरता से लेते हुए श्रीमति खेमाबाई अहिरवार ने इस मुद्दे को ज़िला पंचायत की बैठक में प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद यह कार्य मंजूर हुआ। अब बीते 5-6 दिनों से विद्यालय परिसर में पेवर ब्लॉक बिछाने का कार्य लगातार चल रहा है। आधे से अधिक काम पूरा हो चुका है और परिसर अब स्वच्छ, आकर्षक और व्यवस्थित दिखने लगा है। विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और ग्रामीणों ने कहा कि इस काम से विद्यालय की सुंदरता और उपयोगिता दोनों बढ़ गई हैं। बारिश में अब बच्चों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। छात्रों ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए ज़िला पंचायत सदस्य श्रीमति खेमाबाई अहिरवार और ग्राम पंचायत रामटोरिया की सरपंच श्रीमति बबली आदिवासी का धन्यवाद किया। “अब हमारा स्कूल शहरों की तरह सुंदर लग रहा है, और बारिश में फिसलने की चिंता भी नहीं रहेगी।” — छात्रों ने खुशी जाहिर की। इस पहल ने न केवल बच्चों की परेशानी दूर की है बल्कि ग्राम पंचायत रामटोरिया को एक आदर्श पंचायत के रूप में पहचान भी दिलाई है।