टीकमगढ़: लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, नेत्र सहायक अधिकारी ₹30 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार

टीकमगढ़: लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, नेत्र सहायक अधिकारी ₹30 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार

Tikamgarh: Lokayukta takes major action, eye assistant officer arrested while taking bribe of ₹30 thousand टीकमगढ़ ! सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद जो राशि मिलती है उसे रिश्वत दिए प्राप्त करना नामुमकिन सा है। सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद जो राशि मिलती है उसे रिश्वत दिए प्राप्त करना नामुमकिन सा है। इन पैसों पर सभी की नजर लगी रहती है। ऐसे ही एक मामले में नेत्र सहायक को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। वह रिटायरमेंट के बाद मिलने बाले देयक के लिए पैसे मांग रहा था। टीकमगढ़ में जिला अस्पताल में पदस्थ नेत्र सहायक उमेश जैन को लोकायुक्त ने रिश्वत के 20 हजार रुपए के साथ रंगे हाथों पकड़ा। अब लोकायुक्त पुलिस आगे की कार्रवाई में लगी है। सागर लोकायुक्त पुलिस ने ये कार्रवाई की। लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि रमेशचंद्र नायक ने मामले की शिकायत की थी। इसकी जांच के बाद पुष्टि होते ही लोकायुक्त ने जाल बिछाया और नेत्र सहायक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। नेत्र सहायक उमेश जैन ने रिश्वत की मांग कीपहाड़ी बुजुर्ग निवासी रमेश चंद्र नायक स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के पद पर पदस्थ थे। हाल ही में वे रिटायर हुए हैं। रमेश चंद्र नायक के अनुसार रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि के संबंध में उन्होंने स्थापना के बाबू संतोष अम्बेडकर से बात की तो उन्होंने नेत्र सहायक उमेश जैन से मिलने को कहा। जैन ने इस काम के लिए रिश्वत की मांग की। शिकायत कर्ता के अनुसार नेत्र सहायक उमेश जैन ने 30 हजार रुपए की मांग की। बाद में 28 हजार रुपए में काम करना तय हो गया। रमेशचंद्र नायक ने इसकी शिकायत लोकायुक्त को की। सोमवार को पुलिस ने जाल बिछाते हुए रिश्वत के 20 हजार रुपए के साथ नेत्र सहायक उमेश जैन को गिरफ्तार किया है। रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी के बाद आरोपी पर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है। MP SAMWADmpsamwad.in

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: महिला एवं बाल विकास अधिकारी ₹20 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: महिला एवं बाल विकास अधिकारी ₹20 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार

Lokayukta takes major action: Women and Child Development Officer arrested for taking bribe of ₹20,000 छिंदवाड़ा। महिला एवं बाल विकास विभाग में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में विभागीय अधिकारियों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से धमकाकर रिश्वत लेने का आरोप लगा था, जिसकी जांच अभी जारी है। इसी बीच जुन्नारदेव से एक नया मामला सामने आया है। लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी सीमा पटले को ₹20,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह राशि विभागीय कार्यों में अनियमितताओं को दबाने और फाइलें आगे बढ़ाने के एवज में मांगी गई थी। इस कार्रवाई में परियोजना अधिकारी के साथ तीन आंगनबाड़ी सहायिकाएं भी पकड़ी गई हैं। लोकायुक्त टीम ने मौके से रिश्वत की राशि बरामद कर सभी आरोपितों को हिरासत में ले लिया है। मामले की जांच जारी है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि विभाग में लगातार सामने आ रहे रिश्वतखोरी के मामलों ने पारदर्शिता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। MP SAMWADmpsamwad.in

नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे स्वास्थ्य मंत्री: जीतू पटवारी

छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के परासिया तहसील में हुई दर्जनों बच्चों की मौत के मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को मृतक बच्चों के परिजनों से भेंट करते हुए उन्हें यह भरोसा दिलाया कि हर हाल में कांग्रेस उनके साथ खड़ी है जीतू पटवारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा से लेकर ड्रग कंट्रोलर, पी एस और स्वास्थ सचिव को निलंबित करने की कार्यवाही करे, तब लगेगा की प्रदेश की मोहन सरकार बच्चों की मौत के मामले में गंभीर है। मृतक बच्चों के परिजनों से श्री पटवारी ने वन टू वन बात करते हुए कहा सरकार अगर मृतक बच्चों के परिजनों के आसू पोछना चाहती है तो तत्काल परिजनों को एक एक करोड़ का मुहावजा देते हुए नागपूर में इलाजरत बीमार बच्चों की ईलाज की समुचित व्यवस्था कराए। जिले में अब तक किडनी फेल होने से मौत का आंकड़ा 18 के पार पहुंच गया है। लेकिन सरकारी आंकड़े कुछ ओर ही कह रहे हैं। MP SAMWADmpsamwad.in

सड़कों पर मौत का तांडव , मप्र में हर घंटे में एक जानलेवा दुर्घटना, हर दिन 150+ एक्सीडेंट, 38 से ज्यादा मौतें

सड़कों पर मौत का तांडव , मप्र में हर घंटे में एक जानलेवा दुर्घटना, हर दिन 150+ एक्सीडेंट, 38 से ज्यादा मौतें

Death on the roads: One fatal accident every hour in Madhya Pradesh, 150+ accidents daily, and over 38 deaths. भोपाल। Death on the roads मध्य प्रदेश 2023 में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में देश के सबसे खतरनाक राज्यों में से एक रहा है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कुल 14,098 लोगों की मौत हुई, जो भारत की कुल आकस्मिक मौतों का 9.8 प्रतिशत है। 2022 की तुलना में दुर्घटनाओं में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट बताती है कि 2023 में मध्य प्रदेश में 54,763 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन दुर्घटनाओं में 54,699 लोग घायल भी हुए। राज्य में आकस्मिक मृत्यु दर 49.8 रही, जो देश में छठी सबसे अधिक दर है। मध्य प्रदेश के हाईवे खतरनाक Death on the roadsयात्रियों के लिए राजमार्ग सबसे खतरनाक साबित हुए। भारत की कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 7 प्रतिशत केवल मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर दर्ज किया गया। शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच का समय विशेष रूप से जोखिम भरा रहा, इस दौरान 10,613 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इसके अलावा, देश में हुई घातक बस दुर्घटनाओं में से 10.2 प्रतिशत मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मिलाकर हुईं। छोटे वाहनों से ज्यादा हुए एक्सीडेंट Death on the roadsखराब बुनियादी ढांचा और पर्यावरणीय कारक भी इन मौतों में योगदान करते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, भारी और यात्री वाहनों के कारण बड़ी संख्या में मौतें हुईं। राज्य की सड़कों पर स्ङ्क/जीप और कारों से होने वाली दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या ट्रक/लॉरी/मिनी-ट्रक से होने वाली मौतों से अधिक थी। राजधानी भोपाल में भी बढ़ोतरी Death on the roadsराष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में 4.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि 2022 की तुलना में हुई है। कुल 2,906 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 196 लोगों की जान गई और 2,196 लोग घायल हुए। रात 9 बजे से आधी रात तक का समय सबसे खतरनाक रहा। दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री सबसे ज़्यादा असुरक्षित पाए गए। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने भी भोपाल को ओवर-स्पीडिंग के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में चौथे स्थान पर रखा था। MP SAMWADmpsamwad.in

प्रदेश सरकार चंबल के बीहड़ में सोलर प्लांट लगाने की तैयारी

प्रदेश सरकार चंबल के बीहड़ में सोलर प्लांट लगाने की तैयारी

The state government is preparing to set up a solar plant in the Chambal ravines. ग्वालियर। प्रदेश सरकार अब चंबल के बीहड़ में सोलर प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बीहड़ की 60 हजार हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इस भूमि पर सोलर प्लांट लगाने की संभावनाओं का आइआइटी रुड़की से अध्ययन कराया जा रहा है। इस अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बीहड़ की भूमि कभी डकैतों के लिए प्रसिद्ध रही है, लेकिन इसका उपयोग अब सौर ऊर्जा बनाने में किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट में चंबल नदी, जलीय जीवों के संरक्षण और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाएगा। सरकार इस दिशा में भी विचार कर रही है कि क्यों न बीहड़ की भूमि का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन के लिए भी किया जाए। आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञ इस पहलू से भी अध्ययन करेंगे। मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैंस ने बताया कि हमारे पास बीहड़ क्षेत्र की सेटेलाइट इमेज है, इसका पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के भूमि का डाटा से मिलान कराया जा रहा है। इससे यह पता लग जाएगा कि कितनी भूमि उबड़ खाबड़ है और कितनी भूमि समतल। भूमि का वर्गीकरण कर मैपिंग की जा रही है और यह निर्णय लिया जाएगा कि कितनी भूमि का सोलर प्लांट लगाने में उपयोग किया जा सकता है। काफी कुछ आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों की ओर से किए जाने वाले अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा। MP SAMWADmpsamwad.in

राजनीतिक संरक्षण प्राप्त खनिज माफिया कर रहे अवैध उत्खनन

राजनीतिक संरक्षण प्राप्त खनिज माफिया कर रहे अवैध उत्खनन

Illegal mining is being carried out by the politically protected mining mafia. रीवा ! politically protected mining mafia जिले भर में चल रहे अवैध उत्खनन एवं परिवहन के चलते शासन को हर वर्ष करोड़ो रूपये की चपत लग रही है. इस अवैध कारोबार को अंजाम देने वाले खनन माफियाओं के आगे प्रशासन मौन है. अवैध कारोबार पर नकेल कसने के लिये कोई कार्यवाही खनिज महकमे द्वारा नही की जा रही है. रीवा और मऊगंज जिले में अवैध उत्खनन राजस्व एवं वन भूमि में चल रहा है.कुछ माह पूर्व मऊगंज कलेक्टर ने दस करोड़ से अधिक का जुर्माना अवैध उत्खनन पर लगाया था. लेकिन इस तरह का जुर्माना रीवा में नही लगा. मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र के हाटा लौढी सहित नईगढ़ी, मऊगंज, रीवा के सिरमौर, बेला, नौवस्ता एवं बनकुंइया क्षेत्र में सैकड़ो छोटी-बड़ी खदाने है. जहां से पत्थर निकाल कर बेचा जा रहा है. खनिज विभाग के संरक्षण में अवैध कारोबार चल रहा है. राजस्व, वन भूमि को खनिज माफिया खोखला कर रहे है. खनिज विभाग राजस्व लक्ष्य को पूरा नही कर पाता. अगर अवैध उत्खनन और परिवहन पर कार्यवाही की जाय तो अच्छा खासा राजस्व मिल सकता है. गत वर्ष भी लक्ष्य प्राप्त करने में खनिज विभाग पीछे रहा है. राजस्व कम आने पर सतना के खनिज अधिकारी पर निलंबन की कार्यवाही हुई. लेकिन रीवा में राजस्व कम आने पर कोई कार्यवाही नही की गई. मुरूम की कई अवैध खदाने politically protected mining mafiaरीवा के सेमरिया क्षेत्र में अवैध तरीके से मुरूम का उत्खनन किया गया. जिसकी शिकायत भी स्थानीय लोगो द्वारा की गई. कलेक्टर के यहा की गई शिकायत के बाद खनिज विभाग ने मौके में पहुंचकर जांच की और जांच के नाम पर लीपापोती की गई जो भी शिकायते खनिज विभाग की पहुंचती है उसे ले देकर दबा दिया जाता है. सडक़ बनाने वाले ठेकेदार निर्माण के दौरान आसपास की मुरूम खदानो से मुरूम का अवैध उत्खनन करते है लेकिन कोई रायल्टी नही जमा की जाती है. जिले में कई जगह मुरूम की अवैध खदाने चल रही है. जिसकी जानकारी भी खनिज अधिकारी को है. Read more: सरकार इन किसानों को नहीं देगी 21वीं किस्त, तत्काल जानें स्वीकृत लीज के बाहर होता है अवैध उत्खनन politically protected mining mafiaरीवा के बेला, बनकुइया, नौवस्ता क्षेत्र में खुलेआम अवैध उत्खनन चल रहा है. जिन लोगो ने लीज ले रखी है वहां तो उत्खनन होता है लेकिन लीज की जमीन पर उत्खनन केवल दिखावे के लिये रहता है. अवैध रूप से उत्खनन दूसरी जमीनो पर किया जाता है. इसके अलावा स्थानीय लोगो द्वारा व्यापक पैमाने पर खदाने लगाई गई है. जिसकी न तो कोई लीज है और न ही खनिज विभाग को कोई शुल्क दिया जाता है. अवैध तरीके से पत्थर का उत्खनन कर बेचा जाता है. यहां से निकलने वाला पत्थर क्षेत्र में लगी स्टोन के्रेसरो में पहुंचता है. सुबह से लेकर रात तक पत्थर की तोड़ाई और टैक्ट्ररो से परिवहन का नजारा देखा जा सकता है. प्रतिदिन सैकड़ो ट्रेक्टर पत्थर का अवैध परिवहन होता है. जो आसपास क्रेसर लगे है यहां अवैध रूप से परिवहन होकर आने वाले पत्थरो से ही गिट्टी बनाई जा रही है यह अवैध कारोबार वर्षो से क्षेत्र में फलफूल रहा है. शासन को भले ही करोड़ो रूपये की क्षति इस अवैध उत्खनन से हो रही हो लेकिन जिला प्रशासन खनिज माफियाओं के आगे मौन है. MP SAMWADmpsamwad.in

सरकार इन किसानों को नहीं देगी 21वीं किस्त, तत्काल जानें

सरकार इन किसानों को नहीं देगी 21वीं किस्त, तत्काल जानें

The government will not give the 21st installment to these farmers, know immediately नई दिल्ली। PM Kisan Samman Nidhi देश की तमाम राज्य सरकारें अपने नागरिकों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती हैं। इनमें कई योजनाएं सीधे किसानों के लिए होती हैं। छोटे और सीमांत किसान अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और उन्हें सरकारी मदद की जरूरत होती है। केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई है। ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो। पीएम-किसान योजना के तहत अब तक किसानों को 20 किस्तें भेजी जा चुकी हैं। PM Kisan Samman Nidhi सरकार की ओर से 4 महीनों के अंतराल किस्त की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती रही है। योजना का मकसद छोटे किसानों को आर्थिक राहत देना और उनकी खेती से जुड़ी जीवनशैली में सुधार लाना है। इससे किसान अपनी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकते हैं। अब कई किसान 21वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सभी इसके पात्र नहीं होंगे। कुछ किसानों के खाते में किस्त नहीं जाएगी। क्योंकि उनके दस्तावेज पूरी तरह अपडेट नहीं हैं। ऐसे किसानों को यह काम करने की जरूरत है। जिससे उन्हें योजना का लाभ मिल सके। Read more: कितना बदलेगा भोपाल निगम, जल्द सच आ जाएगा सामने PM Kisan Samman Nidhi आपको बता दें 21वीं किस्त का लाभ कई किसानों को नहीं मिलेगा। जिन किसानों ने अब तक ई-केवाईसी और भूसत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। उनके खाते में पैसे नहीं आएंगे। इन दोनों प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है। तभी 21वीं किस्त का लाभ मिल पाएगा। इसलिए जिन किसानों ने अबतक यह काम नहीं करवाया है। उन्हें तुरंत अपने दस्तावेज अपडेट करने की जरूरत है। ई-केवाईसी पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा कर सकते हैं। और अपने भूसत्यापन के लिए भूलेख रिकॉर्ड की वेबसाइट या विभाग जाना होगा। इसके अलावा 21वीं किस्त पाने के लिए जरूरी है कि बैंक खाता, आधार कार्ड और नाम की जानकारी सही हो। अगर कोई जानकारी अधूरी या गलत पाई जाता है तो भुगतान नहीं होगा। अगर आपने भी नहीं करवाया यह काम तो तुरंत करवा लें। MP SAMWADmpsamwad.in

कितना बदलेगा भोपाल निगम, जल्द सच आ जाएगा सामने

How much will change in Bhopal Corporation, the truth will come out soon भोपाल। भोपाल नगर निगम में नई अधिकारी की जल्द आमद होने वाली है। जो आईएएस अधिकारी संस्कृति जैन भोपाल आने वाली हैं, अभी तक सिवनी जिले की कलेक्टर थीं। उनकी विदाई के दौरान उन्हें वहां की जनता ने खूब सम्मान दिया है, जिसकी चर्चा प्रदेशभर में हो रही है। वैसे भोपाल नगर निगम महिला अधिकारियों के लिए मुफीद नहीं बन सका है। बात करें महपौर आलोक शर्मा के कार्यकाल की, तो आईएएस छवि भारद्वाज आयुक्त थीं। आलोक पूर्व सीएम शिवराज के नजदीकीर रहे थे। उन्होंने छवि को प्रेसर पॉलिटिक्स के चलते काम नहीं करने दिया। वे सोमवार को भानपुर खंती का दौरा करने वाली थीं। यह खबर जैसे ही आलोक को लगी, तो उन्होंने उसके पहले ही रविवार रात को उनका तबादला करवा दिया। इसके बाद प्रियंका दास आईं। उन्होंने निगम की माली हालात को सुधारने के लिए खूब मेहनत की। डीजल चोरी रोकना उनके लिए भारी पड़ गया। इनसे आलोक की पटरी नहीं खाई। आनन-फानन में अलोक ने उनको भी विदा कर दिया।  आमने-सामने होंगी दोनों महिला  नेता और अफसर अब महिला महापौर मालती राय हैं। जो राजधानी के एक मंत्री की खास हैं। हरेंद्र नारायण निगम के लचर ढर्रे को सुधारने में लगे रहे। वे ज्यादा सिफारिश पसंद नहीं करते थे। इसी दौरान उपयुक्त निधि सिंह की निगम में आमद हुई। उनका सख्त रवैया महापौर समेत उनके समर्थक पार्षदों को पसंद नहीं आया। उनका महापौर लॉबी ने विरोध करते हुए निंदा प्रस्ताव पास कर दिया और सख्त अंदाज वाली महिला अधिकारी को भागने मजबूर कर दिया था। इस लिहाज से देखें तो भोपाल निगम महिला अधिकारी के लिए ग्रहणकारी रहा है। हरेंद्र नारायण से भी उनकी सही बैठक नहीं चल पाई। हालांकि उन्हें सरकार ने छिंदवाड़ा कलेक्टर बना दिया है। अब सिवनी कलेक्टर आईएएस संस्कृति जैन पदभार सभालने वाली हैं। इस बार ऐसा होगा कि महापौर और आयुक्त दोनों ही महिला आमने-सामने राजधानी की नगर सरकार चलाएंगी। इससे सवाल उठता है कि क्या नगर की सूरत बदलेगी या फिर धक्कापलेट गाड़ी ही चल पायेगी, लेकिन यह कितने दूर चलेगी कह पाना मुश्किल है।वैसे राजधानी भोपाल में  प्रशासनिक कार्यों के दबाव के साथ-साथ राजनीतिक दबाव भारी रहता है।  निगम को घुन की तरह लगा है भ्रष्टाचार  भोपाल नगर निगम में भ्रष्टाचार की बेल बहुत बड़ी है। क्योंकि इसी की दम पर ही निगम चल रहा है। नगर निगम के कारनामो से अखबार के पन्ने डेली भरे रहते हैं। इस पर लगाम लगाना किसी के बस की बात नहीं है। वे इसको रोकने में कितनी कामयाब होंगी, यह आने वाला समय ही बताएगा। भोपाल की जनता उनकी ईमानदारी की छवि देखने के लिए तैयार है। देखना यह है कि निगम में पूर्व में जिस तरह महिला अफसरों के साथ हुआ है, उसको रोकने में वे कितनी सफल होंगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा।  माना जा रहा है नई कमिश्नर जिनकी छवि एक ईमानदार अधिकारी की बनी हुई है। वे सिवनी से ट्रांसफर होकर भोपाल आ रही है। सिवनी से उन्हें गाजे- बाजे के साथ विदाई मिल गई है. संभवतः वे सोमवार को पद ग्रहण कर लेंगी। MP SAMWADmpsamwad.in

मंत्री प्रहलाद पटेल के गढ़ का बीजेपी नेता 20 हजार रुपए लेते रंगे हाथों पकड़ाया, पुलिस ने की कार्रवाई

मंत्री प्रहलाद पटेल के गढ़ का बीजेपी नेता 20 हजार रुपए लेते रंगे हाथों पकड़ाया, पुलिस ने की कार्रवाई

A BJP leader from Minister Prahlad Patel’s stronghold was caught red-handed accepting Rs 20,000; police took action. नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी के साथ अब भाजपा नेता भी झूठे मामले सुलझाने के लिए पैसों की डिमांड करने लगे हैं। ऐसा ही मामला नरसिंहपुर से सामने आया है। जहां भाजपा नेता दुष्कर्म के झूठे मामले से बचाने की एवज में 20 हजार रुपए मांग रहा था। स्टेशनगंज पुलिस ने फर्जी दुष्कर्म के मामले में फंसाने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। रुपए लेने वाला भाजपा का नेता बताया जा रहा है। जो कि पार्टी के टिकट पर शहर के मुशरान वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गया था। दरअसल, शिकायतकर्ता राजेश जैन निवासी धनारे कॉलोनी गली नंबर 3 ने बताया कि उसे छुट्टू उर्फ बृजेंद्र महाराज ने फोन कर अपने ट्रेवल्स ऑफिस बुलाया था। जिसके बाद वह पत्नी के साथ गुरुवार की दोपहर ट्रेवल्स के आफिस पहुंचे तो छुट्टू महाराज ने धमकाते हुए कहा कि महिला थाने में तुम्हारे खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज है। यदि बचना है तो पैसों का इंतजाम करो। इसी दौरान एक महिला पूना बाई पति महेंद्र चौधरी भी वहां आई जिसने खुद को शिकायतकर्ता बताया। साथ ही संदीप राजपूत भी मौके पर पहुंचा और दोनों ने मिलकर राजेश जैन से कहा कि केस से बचना है तो दो लाख रुपए देने होंगे, अन्यथा जेल जाना पड़ेगा। इस मामले की जानकारी राजेश और उसकी पत्नी ने पुलिस और अधिवक्ता संघ को दी। आरोपी को पकड़ने के लिए एसपी ने एसडीओपी के निर्देशन में एक टीम बनाई। रात को जब पीड़ित राजेश नया बस स्टैंड पहुंचे तो उन्होंने छुट्टू महाराज को पांच-पांच सौ के नोट के रूप में 20 हजार रुपए दिए। इसके बाद आरोपी ने किसी को फोन पर इसकी जानकारी दी। कहा कि बाकी रुपए कल देगा। इसी दौरान जब आरोपी ने रुपए गिनने शुरू किए तो आगे-पीछे से आए पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया। पुलिस को देखते हुए आरोपी का कहना था कि वह तो नोट गिनने में मदद कर रहा था। हालांकि, पुलिस ने एक न सुनी और उसे थाने लाया गया, पूरे घटनाक्रम का पुलिस ने वीडियो भी बनाया है। इधर, भाजपा नेता को गिरफ्तार करने के कुछ ही घंटों बाद थाने से छोड़ दिया गया। पीड़ित को आरोपी घर जाकर शिकायत वापस लेने की धमकी दे रहा है। जिसको लेकर पीड़ित ने एसपी को शिकायती आवेदन दिया है। कांग्रेस ने ली चुटकीमध्यप्रदेश कांग्रेस ने एक्स हैंडल पर लिखा कि मध्यप्रदेश में भाजपाई जो ना करें, वही कम है। हर गोरखधंधे में कहीं ना कहीं कोई भाजपाई सामने आ जाता है। नरसिंहपुर में भाजपा नेता छुट्टू महाराज को पुलिस ने रेप केस में फंसाने के नाम पर वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया है। हर तरह के अपराध में भाजपाइयों की संलिप्तता यह बताती है कि सत्ता के संरक्षण में नेताओं ने वसूली को हथियार बना लिया है। MP SAMWADmpsamwad.in

किसानों के लिये जरूरी है, कमलनाथ का कर्ज माफी मॉडल

किसानों के लिये जरूरी है, कमलनाथ का कर्ज माफी मॉडल

Kamal Nath for farmers loan waiver model is essential for farmers. भोपाल। Kamal Nath for farmers loan मध्य प्रदेश आज भी एक कृषि प्रधान राज्य है, वहां करीब 70 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है। इसके बावजूद प्रदेश में किसानों को चुनौतियां बढ़ती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सत्ताधारी पाजपा ने किसानों से जो भी यादे किये वे निभाए नहीं। न तो वादे के मुताबिक 2022 में किसानों की आमदनी पुगनी हुई उऔर न ही 2023 के विधानसभा चुनाव में गेहूं और धान का यह न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया गया, जिसका वादा भाजपा ने किया चा। सवकि इस दौरान कृषि लागत लगातार बढ़ती गई है। ऐसे में जरूरी है कि पलटकर देखा जाए कि प्रदेश के किसानों के हित के लिए अत्तील में कौन से बढ़िया काम हुए थे और क्या उन्हें दुहराया जा सकता है। Kamal Nath for farmers loan पाठकों को याद होगा कि दिसंबर 2018 में मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने सबसे पहले किसानों की कर्जमाफी के आदेश पर दस्तखत किये थे। कर्ज में फंसे किसानों का पूरा अध्ययन करने के बाद कमलनाथ सरकार ने वर्ष 2019 में किसानों का कर्म माफ कर दिया था। प्रदेश के इतिहास में यह सबसे बाते कर्न माफी योजना थी। कमलनाथ सरकार ने दो चरणों में करीब 27 लाख डिसानों का कर्ज माफ किया था, जो प्रदेश के लिये अपने आप में एक रिकॉर्ड है इस योजना के पहले चरण में 20 लाख 23 हजार 136 किसानों का कर्ज माफ किया था और दूसरे चरण में 6 लाख 72 हमार 245 किसानों का कर्ज माफ किया गया। इस तरह करीब 27 लाख किसानों का कर्ज माफ किया गया। कमलनाथ अगले चरण में और भी किसानों का कर्ज माफ करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इस बीए उनकी सरकार गिरा की गई। Kamal Nath for farmers loan इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि कमलनाथ ने किसानों का कर्ज तो साफ किया लेकिन राजकोष पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया। कर्जमाफी के पाले चरण में 7108.96 करोड़ रूपये और दूम चरण में 4538,03 करोड़ रूपये यानी कुरा मिलाकर 11,646.96 करोड़ रूपये के किसान कर्ज माफ किये गए। देवास, खरगोन, मंदसौर, सीहोर और विदिशा जिलों में तो एक-एक लाख से अधिक किसानों का कर्ज माफ किया गया। छिंदवाड़ा में करीब 75 हजार किसानों का कर्ज माफ किया गया। मध्य प्रदेश जैसे राज्य के लिये यह काफी बड़ी संख्या है और खासकर कमलनाथ सरकार की जिस तरह का खाली खजाना मिला था, उसमें तो यह और बड़ी चुनौती थी। लेकिन इस चुनौती से निपटने में कमलनाथ का अनुभव काम आया था। छिंदवाड़ा से 40 साल तक सांसद रहने के कारण ये किसानों की जरूरतों को बखूयी जानते थे, तो दूसरी तरफ देश के वाणिज्य मंत्री के रूप में उनका अनुभव बैंकों पर नकेल कसने में काम आया। कमलनाथ ने बैंकों से कहा कि वे उसी तरह किसानों का कर्ज माफ करें जिस तरह के कोपटि का कि संपूर्ण बकाया राशि की जगह बैंक एका कर्ज माफ करते हैं। इसका मतलब यह या ऐसी राशि पर समझौता करें तो बैंक और राज्य सरकार दोनों को मंजूर हो। कमालनाय बारीक ज्ञान के सामने बैंकों की दलीलें नहीं के बैंकिंग, मौद्रिक नीति और अर्थशास्त्र के टिकी और 11,646.96 करोड़ का कर्ज किसानों के सिर से उतर गया। अब जरा आज की तस्वीर पर गौर करें। Kamal Nath for farmers loan आज स्थिति यह कि किसान पिछले एक महीने में यूरिया में मिल पाने के कारण प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन कर रहे है। नकली खाद और बीज किसानों के लिये दूसरा बड़ा संकट हैं। तीसरी समस्या यह आ गई है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा के नाम पर किसानों से खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार और किसानों ने मिलकर खरीब 2024 में करीब 1792 करोड़ रूपये फसल बीमा का प्रीमियम दिया। उसके बाद राज्य सरकार के अधिकारियों ने माना कि सोयाबीन की फसल को 50 से 70 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। लेकिन बीमा कंपनी ने सैटेलाइट सर्व का बहाना बनाकर इसे खारिज कर दिया और किसानों को बीमा क्लेम के नाम पर 100-200 रुपये पकड़ा दिये। Kamal Nath for farmers loan 2020 में कमलनाथ सरकार गिरने के बाद से किसानों के साथ लगातार यही हो रहा है। ऐसे में जरूरत इस बात की है किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिये मौजूदा सरकार सबसे पहले किसानों की कर्जमाफी करे और इसके लिगे कमलनाथ मॉडल को अपनाए। इसी तरह बीमा कंपनियों पर भी कमलनाथ के अनुभव का लाभ लेते हुए लगाम कसे। सरकार को यह समझना होगा कि जम किसान का कर्ज माफ किया जाएगा तो किसान के पास कुछ पैसा बचेगा। इसी पैसे को किसान बाजार में खर्च करेगा और इससे आर्थिक गतिविधि का पहिया घूमेगा। आर्थिक गतिविधि के लिये पूंजी का गतिमान होना बहुत जरूरी है। अगर एक 10 का नोट एक व्यक्तिकी जेब में है तो वह सिर्फ 10 रूपये है। लेकिन अगर किसान ने 10 रूपये ऑटो वाले को दिये, ऑटो बाले ने परचून वाले को दिये, परचून वाले बच्चे की स्कूल फीस में दिवे, स्कूल वालों ने ऐसे स्टेशनरी चाले को दिये और स्टेशनरी वाले किसान से गेहूं खरीदा तो पांच हाथों से गुजरकर यह 10 रूपये 50 रूपये की आर्थिक गतिविधि कर देते हैं। इसी को वेलोसिटी ऑफ रूपो कहते हैं। Read more: करोड़ो सम्पत्ति के मालिक हैं शिवराज सिंह के चाहते सीहोर विधायक सुदेश राय का साम्राज्य इसलिये बेहतर होगा कि मध्य प्रदेश सरकार हर महीने 5000 करोड़ रूपये का कर्ज लेने के बजाय किसानों का कर्ज माफ करे और किसानों की जेब में पैसा पहुंचाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तेज करे। मुझे लगता है कि सरकार अगर इस संबंध में कमलनाथ से कोई सलाह मांगेगी तो वे प्रदेश हित में जरूर सलाह देंगे। MP SAMWADmpsamwad.in