Petrol Diesel Price 10 October 2025: पेट्रोल-डीजल 4 रुपए महंगा, वाहन मालिकों के अच्छे दिन खत्म, जानिए आपके शहर में क्या है रेट

बिजनेस: Petrol Diesel Price 10 October 2025 ताबड़तोड़ बढ़ती महंगाई के बीच सरकार ने एक बार फिर आम जनता को जोर का झटका दिया है। दरअसल दिवाली से पहले सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के रेट में बढ़ोतरी कर दिया है। सरकार की ओर से जारी निर्देश के अनुसार पेट्रोल कीमत में 4.07 रुपए और डीजल के दाम में 4.04 रुपए बढ़ गए हैं। पेट्रोल डीजल के नए रेट 1 अक्टूबर से लागू कर दिए गए हैं। Petrol Diesel Price 10 October 2025 मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के रेट में 4.07 रुपए बढ़ाया है, जिसके बाद दाम ₹268.68 प्रति लीटर हो गया है। वहीं, हाई स्पीड डीजल की बात करें तो 4.04 रुपए महंगा होने के बाद ग्राहकों को प्रति लीटर 276.81 रुपए चुकाने होंंगे। सरकार की मानें तो ईंधन की कीमतों को हर दो सप्ताह में अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार के रुझानों, विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और घरेलू कराधान में बदलाव के आधार पर समायोजित किया जाता है। बता दें कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का महंगाई (Inflation) पर सीधा असर पड़ता है, क्योंकि यह उत्पादन और परिवहन लागत को बढ़ाता है, जिससे आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं, विशेष रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ जाती हैं। वित्त मंत्रालय ने एक दिन पहले अपने मासिक आर्थिक दृष्टिकोण में नोट किया था कि बाढ़ से संबंधित व्यवधान खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे उपभोक्ता कीमतें बढ़ सकती हैं। MP SAMWADmpsamwad.in

सरकार इन किसानों को नहीं देगी 21वीं किस्त, तत्काल जानें

सरकार इन किसानों को नहीं देगी 21वीं किस्त, तत्काल जानें

The government will not give the 21st installment to these farmers, know immediately नई दिल्ली। PM Kisan Samman Nidhi देश की तमाम राज्य सरकारें अपने नागरिकों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती हैं। इनमें कई योजनाएं सीधे किसानों के लिए होती हैं। छोटे और सीमांत किसान अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और उन्हें सरकारी मदद की जरूरत होती है। केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई है। ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो। पीएम-किसान योजना के तहत अब तक किसानों को 20 किस्तें भेजी जा चुकी हैं। PM Kisan Samman Nidhi सरकार की ओर से 4 महीनों के अंतराल किस्त की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होती रही है। योजना का मकसद छोटे किसानों को आर्थिक राहत देना और उनकी खेती से जुड़ी जीवनशैली में सुधार लाना है। इससे किसान अपनी जरूरतें आसानी से पूरी कर सकते हैं। अब कई किसान 21वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन सभी इसके पात्र नहीं होंगे। कुछ किसानों के खाते में किस्त नहीं जाएगी। क्योंकि उनके दस्तावेज पूरी तरह अपडेट नहीं हैं। ऐसे किसानों को यह काम करने की जरूरत है। जिससे उन्हें योजना का लाभ मिल सके। Read more: कितना बदलेगा भोपाल निगम, जल्द सच आ जाएगा सामने PM Kisan Samman Nidhi आपको बता दें 21वीं किस्त का लाभ कई किसानों को नहीं मिलेगा। जिन किसानों ने अब तक ई-केवाईसी और भूसत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। उनके खाते में पैसे नहीं आएंगे। इन दोनों प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है। तभी 21वीं किस्त का लाभ मिल पाएगा। इसलिए जिन किसानों ने अबतक यह काम नहीं करवाया है। उन्हें तुरंत अपने दस्तावेज अपडेट करने की जरूरत है। ई-केवाईसी पीएम किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पूरा कर सकते हैं। और अपने भूसत्यापन के लिए भूलेख रिकॉर्ड की वेबसाइट या विभाग जाना होगा। इसके अलावा 21वीं किस्त पाने के लिए जरूरी है कि बैंक खाता, आधार कार्ड और नाम की जानकारी सही हो। अगर कोई जानकारी अधूरी या गलत पाई जाता है तो भुगतान नहीं होगा। अगर आपने भी नहीं करवाया यह काम तो तुरंत करवा लें। MP SAMWADmpsamwad.in

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की योजना अधूरी, बेटियों का बड़ा बजट ,सरकार ने अपनी छवि चमकाने पोस्टर और नारों जैसे कार्यों पर पानी की तरह बहाया पैसा

The ‘Save the Girl Child, Educate the Girl Child’ scheme remains incomplete, with a large budget for girls. भोपाल। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना को सरकार पलीता लगा रही है। इस योजना का स्वीकृत फंड का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हुआ। जमीनी क्रियान्वयन और बालिकाओं तक योजना का लाभ नहीं पहुंच रहा है।बेटियों की कम हो रही संख्या को समान अनुपात में लाने के लिए सरकार की ओर से हर स्तर पर प्रयास किए जाते हैं, लेकिन उनका ग्राउंड जीरो पर असर दिखाई नहीं देता है। राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य गिरते लिंगानुपात को रोकना, कन्या भ्रूण हत्या पर से लगाना तथा बालिकाओं की शिक्षा और शारीरिक एवं मानसिक विकास से जुड़े कार्यों को गति देना है। यह योजना निश्चित तौर पर बदलाव ला सकती है, लेकिन संचालन के तौर तरीके इस योजना को आगे नहीं बड़ा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट बताती है कि इस योजना के तहत पिछले ग्यारह वर्षों में स्वीकृत राशि में से करीब एक तिहाई राशि का इस्तेमाल नहीं हो पाया है। वर्ष 2024-25 (31 दिसंबर तक) में तो सबसे कम करीब 13 फीसद राशि ही खर्च हो पाई। ऐसे में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और इसकी सफलता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। भ्रूण परीक्षण जैसे गैरकानूनी और अनैतिक कृत्य भी तकनीक के दुरुपयोग का ही परिणाम है। देश में लिंगानुपात गड़बड़ाने का एक कारण भ्रूण परीक्षण भी है। हालांकि इस पर कानूनन प्रतिबंध है, लेकिन चोरी-छिपे भ्रूण परीक्षण कराने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं।हमारे समाज की रूढ़िवादी मानसिकता भी इसके लिए जिम्मेदार है। बेटे को प्राथमिकता और बेटियों को परिवार पर बोझ समझने की प्रवृत्ति आज भी मौजूद है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना में समाज की इस सोच को बदलने का आह्वान भी शामिल है। इसके क्रियान्वयन में लापरवाही देखी जा रही है। जब इस योजना के तहत स्वीकृत धनराशि का एक बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं किया जा रहा है, इससे कई बालिकाओं तक इसका लाभ पहुंचा हीं नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले ग्यारह वर्षों में इस योजना के तहत स्वीकृत धनराशि का 100 फीसद इस्तेमाल कभी नहीं हो पाया। जबकि योजना के मुताबिक, इस राशि का इस्तेमाल लड़कियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने, उनमें खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने, आत्मरक्षा का प्रशिक्षण, पोषण कार्यक्रम, स्वास्थ्य सुविधाएं और शौचालय के निर्माण जैसे कार्यों पर किया जाता है। जिला स्तर पर इस योजना को लागू करने के लिए धनराशि राज्य सरकार के माध्यम से प्रदान की जाती है। हकीकत यह भी सामने आई है कि कई जगह पोस्टर और नारों जैसे कार्यों पर ही अधिक राशि खर्च की गई है, जबकि बालिका शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं पर वास्तविक खर्च सीमित रहा। इससे साफ है कि इस योजना को जमीन पर उतारने में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। इसकी जिम्मेदारी तय होना चाहिए, तभी यह योजना आगे बढ़ पाएगी। MP SAMWADmpsamwad.in

RSS के सह सरकार्यवाह का विवादित बयान बोले – बोले ‘भारत माता की जय बोलने से राष्ट्रभक्ति नहीं होती’

RSS’s co-general secretary made a controversial statement, saying, “Saying Bharat Mata ki Jai doesn’t make one patriotic.” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा- भारत माता की जय बोलने से राष्ट्रभक्ति नहीं होती है। जीवन के हर पल, हर क्षण जब मैं समाज और देश के लिए कुछ करता हूं तो उसे राष्ट्रभक्ति कहते हैं। उन्होंने कहा- आज हमारे समाज के अंदर बहुत सारी शक्तियां ऐसी हैं, जो इस समाज को बांटने का प्रयास कर रही है। जगह-जगह जातियों के आधार पर समाज को लड़ाने के प्रयास हो रहे हैं। हमारे देश पर एक हजार साल या तो विदेशी शक्तियों का शासन था या उनके प्रभावों के आधार पर शासन चला, लेकिन पहली बार उन्हें लग रहा है कि हमारा अस्तित्व खतरे में है। यह समझकर उन्होंने रणनीति बदल ली है। सब एकत्र हो गए हैं और उन्होंने अपना एक कॉमन दुश्मन भारत, हिंदू और संघ को मान लिया है। संघ पर प्रश्न कैसे खड़े किए जाएं। इसके लिए सोशल मीडिया, मीडिया में आप देख रहे हैं, कई प्रयास चल रहे हैं। जयपुर के सीकर रोड स्थित हरमाड़ा नगर की हेडगेवार बस्ती में गुरुवार को विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने ये बातें कही। सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा- हर व्यक्ति को अपने मन में विचार करना चाहिए कि आज मैंने देश के लिए क्या किया, आज मैंने समाज को क्या दिया। दुर्भाग्य से सारा समाज मैं, मेरा परिवार, आत्मकेंद्रित, समाज से उदासीन, यही चारों तरफ का वातावरण दिखाई देता है। ईर्ष्या, द्वेष, गुटबाजी पता नहीं कब समाज के अंदर आ गई। उन्होंने कहा- चार व्यक्ति मिलकर एक मंदिर बनाने का अच्छा काम शुरू करते हैं। दो ग्रुप हो जाते हैं, सब धार्मिक हैं, सब आस्थावान हैं, लेकिन आपस में लड़ते हैं। समाज के अंदर पता नहीं किस कालखंड में आत्मविश्वास खत्म हो गया। अरुण कुमार ने कहा- समाज में जो शक्तियां देश को तोड़ना चाहती है। इस भारत को आगे बढ़ने से रोकना चाहती है। उसे हमें समझना होगा। हम महापुरुषों के नाम पर लड़ना शुरू कर देते हैं। आरक्षण के नाम पर समाज आमने-सामने खड़े जाते हैं। उन्होंने कहा- समाज के अंदर नॉन इश्यूज को लेकर बहुत बड़े-बड़े आंदोलन खड़े हो गए हैं। आने वाले समय में समाज बांटने के प्रयास ओर बढ़ेंगे। इसके प्रति भी जागरूक रहना होगा। MP SAMWADmpsamwad.in